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कहीं मिले खाने के पैकेट तो कहीं फटकार

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सिरसा कलार में खड़े रिक्शा चालक - फोटो : ORAI
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सिरसाकलार (जालौन)। जटहौली और सिरसाकलार के बीच स्थित जखा बंबी पर अचानक दो सवारी और एक माल ढोने वाला रिक्शा लेकर तीन लोग पहुंचते हैं। गमछे से पसीना पोंछते तीनों अगल बगल बैठकर बातें करने लगते हैं।
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उनके रिक्शे पर भी कुछ गृहस्थी का सामान रखा है। तभी एक रिक्शा चालक जेब से मोबाइल निकालकर किसी को बताया है कि चाचा जालौन तक पहुंच गए। दो एक दिन में घर भी आ ही जाएंगे। इसके बाद पूछने पर तीनों ने अपने नाम मनोहर, ज्ञान सिंह और शोभा निवासी बांदा बताए। मनोहर का कहना है कि वे लोग दिल्ली में रिक्शा चलाकर पेट पालते हैं। क्या करें लॉकडाउन ने तो कहीं का नहीं छोड़ा।
घर जाने के लिए शुक्रवार की सुबह तीनों एक साथ चले थे। रास्ते में उनके साथ क्या-क्या हुआ यह न पूछो कहकर मनोहर शांत हो गया। दोबारा कुरेदने पर ज्ञानसिंह बोल ही पड़ा कि जब कहीं भी कोई जिला आने वाला होता तो उनके सामने पुलिस जरूर खड़ी नजर आ रही थी, बस इतना कहेंगे कि कहीं पर अच्छी पुलिस मिली तो खाने के पैकेट दिए और कहीं-कहीं पर सिपाहियों और दरोगा की फटकार भी खाने को मिली। शोभा के मुताबिक दिल्ली से बांदा की दूरी करीब सात सौ किमी. है, जिसमें लगभग पांच सौ किमी. की दूरी तय कर चुके हैं। अभी भी घरों को पहुंचने में डेढ़ से दो दिन का समय लग सकता है।
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