उरई। कोरोना संक्रमण के फैलाव रोकने के लिए लगाए गए लॉकडाउन के दौरान स्थगित की गई स्वास्थ्य सेवाएं फिर से सुचारू होने लगी हैं। कोरोना की ड्यूटी में जुटी राष्ट्रीय बाल स्वास्थ्य कार्यक्रम (आरबीएसके) की टीम को भी वापस अपने मूल काम बच्चों की स्क्रीनिंग के लिए निर्देशित किया गया है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की मिशन निदेशक अपर्णा उपाध्याय ने सीएमओ को इस संबंध में पत्र भेजा है।
इसमें कहा गया है कि माध्यमिक विधालयों में कक्षा नौ से लेकर इंटर तक की कक्षाएं संचालित होने लगी हैं। लिहाजा आरबीएसके की टीम को कार्ययोजना बनाकर सरकारी और सहायता प्राप्त विद्यालयों में पढ़ने वाले छात्रों का स्वास्थ्य परीक्षण करना सुनिश्चित करें। स्वास्थ्य परीक्षण के दौरान कोरोना संबंधी गाइडलाइन का पूरा पालन किया जाए।
आरबीएसके के नोडल अधिकारी डॉ. एसडी चौधरी ने बताया कि आरबीएसके के अंतर्गत मोबाइल हेल्थ टीम के माध्यम से स्कूलों और आंगनबाड़ी केंद्रों में जन्मजात दोष वाली बीमारियों की पहचान के लिए स्वास्थ्य परीक्षण किया जाता है। इसमें चिह्नित बच्चों को इलाज के लिए सीएचसी, जिला अस्पताल, एनआरसी, जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र और मेडिकल कालेज में निशुल्क उपचार के लिए भेजा जाता है। सर्जरी वाले मामलों में बच्चों को अलीगढ़, कानपुर, झांसी, लखनऊ जैसे स्थानों पर भी भेजा जाता है।
जिला शीघ्र हस्तक्षेप केंद्र के प्रबंधक रवींद्र सिंह चौधरी ने बताया कि जिले में नौ ब्लाकों में 18 टीम हैं। एक टीम में एक पुरुष व एक महिला चिकित्सक, एक पैरामेडिकल व स्टाफ नर्स होती है। अभी स्कूल व आंगनबाड़ी केंद्र बंद होने के दौरान वीएचएनडी (विलेज स्वास्थ्य पोषण दिवस) पर टीम जाकर बच्चों का स्वास्थ्य परीक्षण कर चिह्नित करने का काम कर रही है।