उरई। जिला अस्पताल में गर्भवती परामर्श के बाद अल्ट्रासाउंड के लिए न भटकें और उसे आसानी से यह सुविधा प्राप्त हो सके। इसके लिए अल्ट्रासाउंड की व्यवस्था की गई है। लेकिन, चूहों के तार कुतरने से महिला अस्पताल में पिछले दो माह से अल्ट्रासाउंड मशीन खराब है। इससे गर्भवतियों को निजी अल्ट्रासाउंड सेंटरों पर जाकर आठ सौ रुपये से 15 सौ रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
जिला महिला अस्पताल में प्रतिदिन करीब 35 से 40 महिलाओं का अल्ट्रासाउंड होता है। मशीन करीब दस साल पुरानी बताई जाती है। कुछ समय पहले पहले मशीन के वायर को चूहों ने कुतर दिया, उसके बाद मशीन चली नहीं। कुछ समय बाद उसे ठीक कर लिया गया, लेकिन मशीन रिपोर्ट ठीक नहीं दे पा रही थी। लिहाजा उसको दो महीने पहले बंद कर दिया गया।
अस्पताल के अधिकारियों का कहना है कि मशीन अब बेकार हो चुकी है। नई मशीन आएगी। तब तक के लिए विकल्प के तौर पर अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था की जाएगी। अब तक मशीन उपलब्ध नहीं होने की वजह से महिलाओं को भटकना पड़ रहा है। निजी अल्ट्रसाउंड सेंटरों में जाकर उन्हें खर्च करना पड़ रहा है।
मरीजों की बात
जयरामपुर निवासी अंशू कहना है कि वह सरकारी अस्पताल आई थीं। अल्ट्रासाउंड कराना था, लेकिन मशीन ठीक नहीं होने की बात कही गई। निजी सेंटर में जाकर 15 सौ रुपये खर्च करने पड़े। महिला रजनी का कहना है कि उन्होंने डॉक्टर को दिखाया तो उन्होंने प्राइवेट में ही अल्ट्रासाउंड कराने की सलाह दे दी। इस पर उन्होंने वहां पर 800 रुपये में अल्ट्रासाउंड कराया पड़ा। अस्पताल में होता तो रुपये नहीं लगते।
दलाल भी हो गए सक्रिय
-महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड मशीन खराब होने की वजह से निजी सेंटरों से कमीशन लेने के चक्कर में कई दलाल भी सक्रिय हो गए हैं। अस्पताल में अल्ट्रासाउंड के लिए वह गर्भवती महिलाओं को अपने सेंटरों के लिए प्रेरित करते हैं। कई बार ये दलाल ज्यादा कमीशन पाने के लिए अधिक रुपये में भी अल्ट्रासाउंड करा देते हैं। जालौन रोड के रहने वाले विकास ने बताया कि उनकी पत्नी गर्भवती हैं। एक महिला द्वारा अस्पताल के बाहर एक अल्ट्रासाउंड सेंटर पर जाने की नसीहत दी। वहां उन्हें एक हजार रुपये देने पड़े।
वर्जन
अल्ट्रासाउंड मशीन रिपोर्ट ठीक नहीं दे पा रही है। इसलिए उसे बंद कर दिया है। शासन से नई मशीन की डिमांड की गई है। इसके साथ ही सीएमओ से पत्राचार कर विकल्प के तौर पर एक अल्ट्रासाउंड मशीन की व्यवस्था करने को कहा है। -सुनीता बनौधा, सीएमएस, जिला महिला अस्पताल