स्थिति ये है कि कई स्थानों पर लोगों को दिन के वक्त अलाव जलाकर तापना पड़ा। यह हालत तब है जब सोमवार को निकली तीखी धूप ने किसानों के माथे की चिंता की लकीरें गहरी कर दी थीं। लगने लगा था कि इस बार गेहूं और मटर की फसल को नुकसान होगा पर ऐन वक्त पर मौसम में आए बदलाव ने किसानों को एक बार फिर से राहत का अहसास कराया है, हालांकि जिन स्थानों पर ओले गिरे वहां के किसान जरूर चिंतित नजर आ रहे हैं।
कदौरा क्षेत्र में सुबह से ही आसमान पर बादल छाए रहे। 11 बजे के आसपास काली घटाएं आईं और देखते ही बारिश के साथ ओले गिरने शुरू हो गए। करीब पांच से आठ मिनट तक क्षेत्र बागी, बसरेही, चतेला आदि इलाकों में ओलावृष्टि हुई। जबकि नजदीक लगे कालपी और आटा भी झमाझम बारिश करीब पंद्रह से बीस मिनट तक हुई। जिससे ठंड भी बढ़ गई। सड़क से लेकर घरों तक में लोग आग तापते नजर आए। सिरसाकलार में सुबह से ही बूंदाबांदी शुरू होने के साथ ही ठंड बढ़ी तो लोगों की चहलकदमी भी थम गई। कई बच्चे भी बारिश के कारण स्कूल नहीं गए। दोपहर तक बाजारों में भी सन्नाटा छाया रहा। एट में भी हाईवे पर वाहनों की संख्या काफी कम रही। लोग जरूरी काम से ही घरों से निकले। बाजारों और चौराहों पर लोगों ने अलाव जलाकर ठंड से राहत पाने का प्रयास किया।
सरावन के किसान ऋषभराज का कहना है कि बारिश से हरी मटर के दामों में इजाफा होगा। इसके अलावा सरसों, चना, मसूर व गेहूं की भी अच्छी पैदावार होगी। एट के युवा किसान पवन पटेल का कहना है कि तेज धूप से गेहूं और चने की फसल झुलस रही थी, उसे राहत मिली है। करीब 15 दिन तक ठंडक रहेगी। सिरसाकलार के किसान रामविजय सिंह का कहना है कि बारिश और बूंदाबांदी किसी अमृत से कम नहीं है। गेहूं, चना और लाही को खूब फायदा होगा। कदौरा के किसान राजेंद्र बाबू का कहना है कि बारिश तो ठीक है लेकिन जो ओले गिरे हैं, उससे जरूर मटर, चने में लगे फूल टूट रहे हैं। जिससे फसलों को नुकसान की आशंका है।