एट (जालौन)। इस्लामी कैलेंडर के 9वें माह रमजान मुबारक का महीना शुरू हो जाता है। इसमें मुस्लिम भाई सहरी, रोजा, इफ्तार और अन्य इबादतों का सिलसिला भी शुरू हो जाता है।
4 मई को पहला अशरा रहमतों का पूरा होने जा रहा है। लॉकडाउन का भी दूसरा चरण 3 मई को पूरा हो रहा है। रमजान में तीन भागों में बांटा गया है। पहले दस रोजे रहमतों के, दूसरा अशरा बरकतों का और तीसरा अशरा मगफिरत का होता है। लॉकडाउन के चलते इस साल मस्जिदों में होने वाली इबादतें घरों पर ही की जा रही है।
ख्वाजा गरीब नवाज मस्जिद के पेश इमाम सलमान चिश्ती का कहना है कि अपने घर, खानदान और मुल्क की सलामती के लिए दुआओं का यह अच्छा मौका है। कहा कि इफ्तार और ईद की तैयारियों में फिजूलखर्ची रोककर यह रुपये लॉकडाउन में परेशान लोगों को मदद पहुंचाएं। स्कूल बंद हैं। ऐसे में हम घर में रहकर पढ़ाई के साथ रमजान के रोजे और इबादत कर रहे हैं। जो बच्चे रोजे की भूख-प्यास बर्दाश्त कर सकते हों, उन्हें रोजा रखना चाहिए।
जामा मस्जिद के पेश इमाम आरिफ काजी का कहना है कि यह रमजान माह अब तक का सबसे बेमिसाल है। कोरोना जैसी महामारी के बीच मुस्लिमों ने रोजे रखकर देश की हिफाजत के लिए अपने घरों में दुआ में देश की सलामती मांगे। लॉकडाउन की वजह से सभी लोग फुरसत में हैं। घर पर रहकर रोजा और सभी नमाजों और तरावीह के साथ तिलावत ज्यादा से ज्यादा कर अपने गुनाहों को माफ कराने की कोशिश करें।
पेश इमाम सलमान चिश्ती- फोटो : ORAI