मुहम्मदाबाद। गुरुवार सुबह से जारी बेमौसम बारिश ने किसानों की मेहनत और उम्मीदों पर पानी फेर दिया। किसानों का कहना है कि हरी मटर पूरी तरह बर्बाद हो गई है जबकि धान की फसल को घर पर लाना मुश्किल लग रहा है। जिले करीब 20 एमएम बारिश हुई है।
बारिश से खेत लबालब हो गए। किसानों का कहना है कि जब बारिश की जरूरत होती है, तब आसमान सूखा रहता है। जब खेत तैयार हो जाते हैं, तब बारिश सब कुछ चौपट कर देती है। हरी मटर, चना और मसूर जैसी रबी फसलों की बोआई पूरी हो चुकी थी, लेकिन जलभराव से बीज सड़ने लगे हैं। अब किसान दोबारा बोआई करने के लिए मजबूर हैं। इससे उनका खर्चा कई गुना बढ़ गया है।
करीब 15 दिन तक अब बोआई भी नहीं हो सकेगी। कई किसानों ने बेटी की शादी या कर्ज चुकाने की उम्मीद इसी फसल से जोड़ी थी। नुकसान की भरपाई के लिए किसान प्रशासन से मुआवजा मांग रहे हैं।
किसान बोले – खेत देख रोना आ गया
मुहम्मदाबाद के किसान इस्लाम खान ने बताया कि खेतों में क्यारियां बन गईं हैं। इनमें पानी भर जाने से बीज सड़ गए हैं। अब दोबारा बोआई करनी पड़ेगी। कैसे व्यवस्था होगी।
किसान प्रेम अतरौलिया ने बताया कि 13 बीघा खेत 11 हजार रुपये प्रति बीघा के हिसाब से उधार लिया था। 4250 रुपये का बीज, 10 हजार की जुताई, पांच हजार खाद में खर्च हुए। अब सब पानी में बह गया। मजबूरी में कर्ज लेकर फिर से खेती करनी पड़ेगी।
कुकरगांव निवासी किसान उषा देवी ने बताया कि उनके पति का निधन हो गया है। चार बीघा में मटर बोई थी। बेटी की शादी फरवरी में है। फसल बिकने के बाद शादी की उम्मीद थी लेकिन बारिश ने सब डुबो दिया।
रमपुरा निवासी किसान प्रदीप राजपूत ने बताया कि 50 बीघा में मटर की बोआई की थी। खाद जुटाने में बहुत मुश्किलें आई थीं, लेकिन अब सारी फसल बर्बाद हो गई है। गेहूं की बोआई में ज्यादा खाद लगती है। अगर समय से खाद नहीं मिली तो खेत खाली छोड़ने पड़ेंगे।
खेत बने दलदल, फसल की बोआई लटकी
आटा और संदी क्षेत्र में सैकड़ों एकड़ खेतों में रबी की फसल की बोआई अधर में लटक गई है। सोमवार के बाद गुरुवार की लगातार बारिश ने खेतों को दलदल बना दिया है। किसान अब खेतों में ट्रैक्टर नहीं चला पा रहे हैं।
किसानों ने बयां किया दर्द —
आटा के किसान प्रदीप तिवारी ने बताया कि 80 बीघा में मटर, चना और मसूर की बोआई की तैयारी कर ली थी। बारिश ने सारी मेहनत मिट्टी में मिला दी है।
संदी गांव के संतोष द्विवेदी ने बताया कि 100 बीघा खेतों में मटर की बोआई होनी थी। अब पानी भर गया है। मौसम जल्द नहीं सुधरा तो पूरी फसल चौपट हो जाएगी।
एट और कोटरा में भी फसलों का नुकसान
एट में लगातार बारिश और तेज हवा ने धान और मटर की फसल को भारी नुकसान पहुंचाया है। खेतों में खड़ी धान की बालियां गिरकर चिपक गई हैं। किसानों का कहना है कि मटर की फसल भी सड़ने लगी है। कोटरा क्षेत्र में भी बेमौसम बरसात ने किसानों की कमर तोड़ दी है। धान, मटर, सरसों और लाही की फसलें पानी में डूब गईं हैं। किसान सुमित स्वामी ने बताया कि महंगाई के दौर में जैसे-तैसे खाद-बीज जुटाए थे पर बारिश ने सब चौपट कर दिया।
डीएम ने लिया नुकसान का जायजा, दिए त्वरित सर्वे के निर्देश
जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय और मुख्य विकास अधिकारी ने बारिश से प्रभावित इलाकों का दौरा कर खेतों में जाकर फसलों की स्थिति देखी। उन्होंने किसानों से बातचीत कर उनकी परेशानी जानी और अधिकारियों को त्वरित सर्वे का निर्देश दिया। डीएम ने कहा कि प्रभावित किसानों को फसल बीमा और कृषि निवेश अनुदान योजना के तहत राहत दिलाई जाएगी। उन्होंने राजस्व, कृषि विभाग और बीमा कंपनी की टीमों को मिलकर खेत-खेत जाकर नुकसान का सही आकलन करने के लिए कहा ताकि किसानों को शीघ्र सहायता मिल सके।
जिले में गुरुवार को सुबह से शाम तक करीब बीस एमएम बारिश हुई है।
धर्मघोष, अधिशासी अभियंता बेतवा नहर