संवाद न्यूज एजेंसी
आटा। कदौरा ब्लॉक के आटा थाना क्षेत्र के चमारी गांव का नाम बदलने की चर्चा को लेकर ग्रामीणों ने आक्रोश जताया है। शनिवार को ग्राम प्रधान की मौजूदगी में बुलाई गई खुली बैठक में ग्रामीणों ने नाम बदलने के विरोध में नारेबाजी की और सर्वसम्मति से राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने की सहमति बनाई।
ग्रामीणों का कहना है कि चमारी गांव अनुसूचित जाति की विरासत और धरोहर रहा है। उनके अनुसार गांव को उनके पूर्वजों ने बसाया था और इसी नाम से उनकी पहचान जुड़ी हुई है। ऐसे में ऐतिहासिक नाम बदलने से गांव की पुरानी पहचान धूमिल हो जाएगी।
ग्राम प्रधान बृजेश कुमार गौतम ने ग्रामीणों की राय जानने के लिए खुली बैठक बुलाई थी। बैठक में बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने हिस्सा लिया और गांव का नाम बदलने की चर्चा पर नाराजगी जताई। ग्रामीणों ने कहा कि यदि गांव का नाम बदला गया तो वे जनआंदोलन करने को बाध्य होंगे। साथ ही इस संबंध में राष्ट्रपति को ज्ञापन भेजने का निर्णय लिया गया।
दरअसल, यूपी अनुसूचित जाति वित्त विकास निगम के पूर्व अध्यक्ष डॉ. लालजी प्रसाद निर्मल ने कुछ दिन पहले जिले के चमारी, बरेली के नवाबगंज तहसील के चमरौआ और उन्नाव के चमरौली गांव के नामों पर आपत्ति जताई थी। उन्होंने कहा था कि आजादी के 79 वर्ष बाद भी ऐसे नामों का बने रहना सामाजिक संवेदनशीलता के लिहाज से उचित नहीं है और वह जल्द ही मुख्यमंत्री से मिलकर इन गांवों के नाम बदलने की मांग करेंगे।
इसी बयान के बाद चमारी गांव के ग्रामीणों में ने गांव का नाम न बदलने की मांग की है। बैठक में नंदलाल, शिवकुमार, सर्वेश, दीनदयाल, अमर सिंह, शिवम समेत बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।