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Jalaun News: बारदाने की किल्लत से ठप खरीद, खुले में पड़ा सैकड़ों क्विंटल गेहूं

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कोंच। गेहूं खरीद शुरू होने से पहले ही व्यवस्थाओं की पोल खुलने लगी है। ग्राम जुझारपुरा स्थित बी-पैक्स खरीद केंद्र पर 10 दिनों से बारदाने की किल्लत के चलते खरीद पूरी तरह ठप पड़ी है। हालात यह हैं कि किसानों का सैकड़ों क्विंटल गेहूं केंद्र के बाहर खुले में पड़ा हुआ है। इससे उन्हें भारी नुकसान का डर सता रहा है।
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किसानों का कहना है कि अगर मौसम खराब हुआ या बारिश हो गई तो उनकी पूरी फसल खराब हो सकती है। इसके बावजूद जिम्मेदार विभाग की ओर से अभी तक कोई ठोस व्यवस्था नहीं की गई है। एक ओर जहां अधिकारी सभी केंद्रों पर व्यवस्थाएं दुरुस्त होने के दावे कर रहे हैं, वहीं जमीनी हकीकत इन दावों की पोल खोल रही है। किसान कई दिनों से अपनी उपज लेकर केंद्रों के चक्कर काट रहे हैं, लेकिन बारदाना न होने से उनकी तुलाई नहीं हो पा रही है।

केंद्र प्रभारी विनोद कुमार ने बताया कि बारदाने की कमी के चलते खरीद रुकी हुई है और इसकी डिमांड भेज दी गई है। बारदाना उपलब्ध होते ही खरीद शुरू कर दी जाएगी।
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फोटो - 15 कोंच में केंद्र पर जानकारी लेते किसान व मौजूद प्रभारी।

ई-पॉप मशीन खराब, बारदाने की कमी से दो केंद्र बंद

कोंच। क्षेत्र में गेहूं खरीद व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है। पांच में से दो खरीद केंद्र ई-पॉप मशीन की खराबी और बारदाने की कमी के कारण बंद पड़े हैं। इससे किसानों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

पीसीएफ केंद्र पर ई-पॉप मशीन में तकनीकी खराबी के कारण 1309 बोरियों की फीडिंग नहीं हो सकी है। सिस्टम में ये बोरियां अभी भी खाली दिख रही हैं, जबकि वास्तविकता में उनमें किसानों का गेहूं भरा जा चुका है। इससे नई तुलाई पूरी तरह रुक गई है।

केंद्र प्रभारी कमलेश कुमार के अनुसार मशीन बार-बार खराब हो रही है, जिससे गेहूं की फीडिंग नहीं हो पा रही है। वहीं बारदाने की कमी ने स्थिति और बिगाड़ दी है।

जुझारपुरा बी-पैक्स केंद्र का भी यही हाल है, जहां मशीन की समस्या दूर कराने के लिए उसे रोज जिला मुख्यालय ले जाया जा रहा है, लेकिन समाधान नहीं निकल पा रहा। क्रय-विक्रय केंद्र पर भी पहले ही दिन मशीन फेल हो गई और एक भी किसान की फीडिंग नहीं हो सकी।

कई केंद्र बंद होने से एफसीआई और पीसीएफ केंद्रों पर किसानों की भारी भीड़ उमड़ रही है। किसान ट्रैक्टर-ट्रॉली लेकर कई दिनों से केंद्रों पर डटे हुए हैं और नंबर जून तक पहुंच चुके हैं।

किसानों का आरोप है कि अव्यवस्थाओं के कारण उन्हें आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। उन्होंने प्रशासन से जल्द व्यवस्था दुरुस्त कर सुचारु खरीद शुरू कराने की मांग की है।
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