बुंदेलखंड में सरकार ने गरीबों को मुफ्त में राशन देने की व्यवस्था की है, पर कोटेदार की मनमानी के चलते एक गरीब परिवार को राशन के लिए भूख हड़ताल करनी पड़ रही है। जिलास्तरीय अधिकारी भी भूख हड़ताल को लेकर गंभीर नहीं है। यही वजह है कि मुसमरियां गांव का एक परिवार लगातार दो दिन से भूख हड़ताल पर बैठा है। इस दौरान कोई आला अधिकारी परिवार के सदस्यों की देखने नहीं आया। इससे हड़ताल करने वालों में आक्रोश है।
बुधवार को मुसमरियां गांव निवासी बेबा लज्जा बेटी कलेक्ट्रेट परिसर में अपने पूरे परिवार के साथ भूख हड़ताल पर बैठ गई थी। पहले दिन कोई बात नहीं बनी तो परिवार के छह सदस्य दूसरे दिन गुरुवार को भी भूख हड़ताल पर रहे। इसके पहले वह 20 व 21 जून को भी भूख हड़ताल कर चुके है। उस समय उन्हें एक सप्ताह में पात्रता सूची में नाम दर्ज कराने का भरोसा दिया गया था। जब पूर्ति विभाग ने कोई काम नहीं किया तो परिवार ने फिर से भूख हड़ताल की राह पकड़ ली। इसके पहले तहसील दिवसों से लेकर जिलाधिकारी दरबार में भी शिकायत की जा चुकी है, जिसमें कोटेदार पर पात्रता सूची से जानबूझ कर नाम हटाने का आरोप लगाया था। कैलाश ने बताया कि जब तक अधिकार नहीं मिल जाता, तब तक भूख हड़ताल जारी रहेगी।
भूख हड़ताल पर बैठी सत्यवती ने कहा कि कई बार कोटेदार से निवेदन किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। इसलिए यह निर्णय लेना पड़ा है। इस दौरान, गुड्डी, उत्तम चंद्र, राजाराम, नीतू, उषा, राजू आदि मौजूद रहे।