अवैध मौरंग खनन को लेकर 15 दिन पहले बंधौली में हुई गोलीबारी में घायल हुए तीन लोगों में से एक की मौत के बाद शनिवार को उसका पुलिस की उपस्थिति में अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान कई थानों की पुलिस व पीएसी तैनात रही। डकोर थाना क्षेत्र के ग्राम बंधौली में बालू घाट पर रास्ते से निकलने के विवाद में बालू माफियाओं द्वारा गोलीबारी कर तीन
लोगों को बुरी तरह घायल कर दिया गया था। तीनों घायलों को झांसी रेफर किया गया था। लखचंद का इलाज झांसी में चल रहा था। हालत बिगड़ने पर परिजन उसे दिल्ली ले गए जहां
गुरुवार रात उसकी मौत हो गई। उसका शव शनिवार को सुबह 6 बजे गांव लाया गया। यहां उसका अंतिम संस्कार किया। इस दौरान किसी अप्रिय घटना को रोकने के लिए एक प्लाटून पीएसी बल व कई थाने की पुलिस के साथ थानाध्यक्ष डकोर जाकिर हुसैन मुस्तैद रहे। गांव मुहम्मदाबाद से लेकर बंधौली तक जगह-जगह पुलिस बल तैनात रहा।
अधिकारी लेते रहे पल-पल की खबर
31 मार्च को दिल्ली में लखचंद की मौत की खबर पर पुलिस प्रशासन ने सुरक्षा बढ़ा रखी थी। पुलिस कप्तान बबलू कुमार, एएसपी शकील अहमद, सीओ डॉ. जंगबहादुर सिंह शव के अंतिम संस्कार तक बराबर संपर्क में रहे। वहीं, पीएसी के साथ कई थानों की पुलिस उरई-राठ मार्ग पर घूमती नजर आई।
पहले बहन और लखचंद की होनी थी शादी
मई में पहले बहन और इसके बाद जून माह में लखचंद की शादी होनी थी। खुशियां आने से पहले ही घर आंगन में मातम छा गया। पिता गुलाब सिंह ने बताया कि कर्ज लेकर किसी तरह लखचंद का इलाज कराया गया पर वह नहीं बचा। उनका कहना है कि अब वह कर्ज से डूबे हैं और बेटी की शादी को लेकर चिंतित भी हैं।
खाकी ने ही जीत लिया दिल
जहां एक ओर एक पुलिसकर्मी की वजह से पूरी खाकी शर्मसार हुई तो वहीं घटना वाले दिन से ही झांसी से लेकर दिल्ली तक दो पुलिस कर्मी रामलाल वर्मा और देवेंद्र सिंह सेंगर घायल के साथ रहे। इस बात ने ग्रामीणों का दिल जीत लिया। मृतक के भाई हरिश्चंद ने बताया कि मृतक लखचंद तो इन पुलिस कर्मियों से इस कदर घुलमिल गया था कि उनके सामने न होने पर खाना और दवा नहीं लेता था।