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जिला कारागार के बाहर बंदीरक्षक ने सिपाही पर तमंचे से की फायरिंग, सिपाही बाल बाल बचा

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घटना के बारे में सिपाही से जानकारी लेते एएसपी राकेश सिंह - फोटो : ORAI
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उरई। जिला जेल के बाहर गणतंत्र दिवस की शाम एक बंदी रक्षक सिपाही ने दूसरे सिपाही पर तमंचे से फायर झोंक दिया। हालांकि गोली न लगने से वह बाल-बाल बच गया। इधर, फायरिंग से जेल के बाहर ड्यूटी में तैनात अन्य पुलिसकर्मियों में हड़कंप मच गया। घटना की सूचना जेल प्रशासन व पुलिस को दी गई। सूचना पर एसपी, एएसपी, सीओ, कोतवाल सभी मौके पर पहुंचे। रिपोर्ट दर्ज करने के बाद पुलिस ने देर रात आरोपी सिपाही को तमंचा सहित गिरफ्तार कर गुुरुवार को जेल भेज दिया।
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जिला जेल के बाहर बुधवार शाम ड्यूटी कर जेल से बाहर निकल रहे बंदी रक्षक वीर प्रताप का जेल के गेट पर खड़े पीएसी में प्रति नियुक्ति पर तैनात सिपाही अभिषेक शर्मा से किसी बात पर विवाद हो गया। इसके बाद वीर प्रताप अपने कमरे पर गया और वहां से तमंचा ले आया। सिपाही अभिषेक शर्मा अपने दूसरे साथी अभिषेक कुमार से बात कर रहा था। आरोप है कि वीर प्रताप आया और अभद्रता करते हुए गालीगलौज करने लगा। जब उसने गाली देने से मना किया तो बंदी रक्षक ने जान से मारने की नीयत से अभिषेक शर्मा पर तमंचे से दो फायर कर भाग निकला। अचानक हुई फायरिंग से वहां मौजूद ड्यूटी पर तैनात सिपाहियों में हड़कंप मच गया। हालांकि फायरिंग में सिपाही अभिषेक शर्मा को गोली नहीं लगी, वह बाल बाल बच गया। अभिषेक शर्मा ने उच्चाधिकारियों को जानकारी देते हुए पुलिस को भी सूचना दी। फायरिंग की सूचना पर मौके पर एसपी रवि कुमार, एएसपी राकेश सिंह, सीओ सिटी विजय आनंद, कोतवाल शिवकुमार सिंह सहित पुलिस फोर्स मौके पर पहुंचा और जांच पड़ताल की। पुलिस ने पीड़ित सिपाही की तहरीर पर बंदी रक्षक वीर प्रताप के खिलाफ जानलेवा हमले की धारा में रिपोर्ट दर्ज कर उसकी तलाश शुरू कर दी। पुलिस ने बुधवार देर रात ही तमंचा सहित आरोपी बंदी रक्षक वीर प्रताप को पकड़ लिया। गुरुवार को कार्रवाई कर जेल भेजा गया। जेल अधीक्षक सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि आरोपी बंदी रक्षक वीर प्रताप फर्रुखाबाद का निवासी है और 2015 में वह बंदी रक्षक के पद पर तैनात हुआ था।
इनसेट
पहले भी धमका चुका था बंदी रक्षक
पीएसी में प्रति नियुक्ति पर जिला कारागार में तैनात अभिषेक शर्मा ने बताया कि वह दो वर्ष की ट्रेनिंग पर यहां है। पिछले वर्ष जनवरी में ही वह यहां आया था उसे एक वर्ष यहां तैनात हुए हो चुके हैं। इसके पहले भी कई बार बंदी रक्षक वीर प्रताप उसे डरा धमका चुका था। जिसकी शिकायत उसने संबंधित अधिकारियों से की थी लेकिन अब उसने जान से मारने की नीयत से गोली ही चला दी।
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चार माह से खराब पड़े कैमरे
घटना के बाद जब पुलिस ने जेल अधीक्षक से वहां लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज के लिए कहा तो बताया गया कि कैमरे खराब हैं। जेल अधीक्षक सुनीत कुमार सिंह ने बताया कि जेल के बाहर लगे कैमरे पिछले चार माह से खराब पड़े हैं। इसकी हर 15 दिन में जानकारी मुख्यालय को दी जाती है लेकिन अभी तक कैमरे सही नहीं करवाए गए। इस वजह से घटना की सीसीटीवी फुटेज पुलिस को नहीं मिल सकी। बता दें कि पूर्व में जिला जेल में कई बार बड़ी बड़ी वारदातें हो चुकी हैं। इसके बाद भी कैमरे खराब होना चिंता का विषय है।
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