उरई। 17 दिसंबर की उस आधी रात का बड़ा हादसा डकोर ब्लॉक के मोहाना के ग्रामीण आज भी याद कर सिहर उठते हैं। इसमें मासूम उसकी मां, दादी और एक छात्रा की जान चली गई थी, जबकि डेढ़ दर्जन के करीब लोग घायल हुए थे।
शायद जिम्मेदार उस घटना को भूल गए। यही कारण है कि हादसे का बड़ा कारण बने लोडर में आज भी लोग जान को जोखिम में डालकर गंतव्य रहे हैं। इस पर न ही पुलिस-प्रशासन की नजर पड़ती है और न ही एआरटीओ विभाग कोई ठोस कदम उठा पा रहा है। शहर ही नहीं जिले की सड़कों पर वाहन ढोने वाले वाहनों में खेत में मटर तोड़ने वाले श्रमिक व अन्य लोग भरकर निकलते हैं। कई वाहनों की तो गति भी इतनी तेज होती है कि अचानक ब्रेक लगा तो पीछे असुरक्षित ढंग से बैठे लोगों के साथ बड़े हादसे का खतरा पैदा हो जाता है। पेश है एक रिपोर्ट...
उरई से चुर्खी मार्ग पर मंगलवार सुबह एक लोडर औंता गांव के पास से गुजरा। उसमें करीब 30 से 40 श्रमिक बैठे और खड़े नजर आ रहे थे। लोडर की गति भी काफी तेज थी।
झांसी-कानपुर हाईवे पर आटा क्षेत्र के पास एक लोडर श्रमिकों व अन्य सवारियों को बिठाकर जा रहा था। इसमें कई पीछे, कई लटके हुए भी नजर आ रहे थे।
उरई कोंच मार्ग पर एक ट्रैक्टर चालक ट्राली में लगभग 30 के करीब महिलाओं और पुरुषों को लेकर जा रहा था। ट्राली में कोई रिफ्लेक्टर नजर नहीं आया।
मालवाहक वाहनों में सवारियों का बैठना पूर्ण रूप से प्रतिबंधित है, यह नियमाविरुद्ध है। प्रतिदिन ऐसे लोगों पर कार्रवाई करते हैं। यदि इस तरह की स्थिति ज्यादा है तो इसके लिए अभियान चलाकर कार्रवाई की जाएगी। -राजेश कुमार, एआरटीओ प्रवर्तन