जिला अस्पताल में बच्चे को देखते डाक्टर।
- फोटो : अमर उजाला
लू लपट के बाद अब उमस ने लोगों को बेहाल कर रखा है। उमस बढ़ने से पेट के रोगियों की संख्या बढ़ रही है। खासतौर पर डायरिया के मरीज अधिक बढ़े हैं। जिला अस्पताल के डॉक्टरों का कहना है कि इस मौसम में खास सावधानी बरतने की जरूरत है।
जिला अस्पताल के डाक्टरों का कहना है कि यहां आने वाले मरीजों में आधे से अधिक मरीज डायरिया के होते हैं। शिशु रोग विशेषज्ञ संजीव अग्रवाल का कहना है कि इस उमस भरी गर्मी से बच्चे सबसे जल्दी प्रभावित होते है। इस समय डायरिया व चर्म रोग से पीड़ित बच्चे की संख्या सबसे ज्यादा है। उमस में पसीना अधिक आता है, जिसके चलते शरीर में पानी की कमी हो जाती है। दूषित खान पान, बाजार के कटे हुए फल या जूस पीने से भी डायरिया होता है।
साथ ही पसीने से शरीर पर फोड़े, फुंसी, सीत, व त्वचा संबंधी रोग होते है। छह माह से लेकर दो साल तक के बच्चों की साफ सफाई का विशेष ध्यान रखा जाना चाहिए। यदि किसी बच्चे को उल्टी दस्त हो तो उसे ओआरएस का घोल पिलाएं। इसके बाद भी यदि आराम न मिले तो तुरंत ही डॉक्टर की सलाह ले। डॉक्टर अग्रवाल ने बताया कि पंद्रह दिन पहले तक रोजाना 5-6 बच्चे डायरिया का शिकार होकर आते थे।
चार-पांच दिनों से यह संख्या 15-20 तक पहुंच गई है। फिजीशियन राहुल सचान ने बताया इस मौसम में इंफेक्शन जल्दी फैलता है। इससे बचने के लिए कुछ भी खाने के पहले साबुन से हाथ जरूर साफ करें। इसके अलावा हल्का व ताजा पका हुआ भोजन करें, विशेष तौर पर रात में भारी व तला भुना भोजन न करें।