उरई। आंख के अस्पताल में बाहरी दवाइयों के नाम पर जमकर लूट मची हुई है। एक मरीज को बाहर से 1000 से 1500 रुपये की दवा लिखी जा रही है। जो मरीज बाहर की दवा लेने से मना करते हैं, उनका इलाज नहीं किया जाता। इसके बाद मरीजों को दलाल खुद प्राइवेट मेडिकल स्टोर तक ले जाते हैं। बदले में उन्हें मोटा कमीशन मिलता है। यह दलाली का खेल कई महीनों से चल रहा है। इसके बाद भी जिम्मेदार अनजान हैं। वहीं, डॉक्टरों का मरीजों से कहना है कि अगर आंखों से देखना है तो बजट मत देखो, चुपचाप बाहर की दवा ले लो। जो मरीज बाहर की दवा लेने से मना करता है, उसे बाहर से ही इलाज कराने की सलाह दी जाती है। मरीजों के साथ इस लूट का खुलासा शुक्रवार को अस्पताल पहुंची संवाद न्यूज एजेंसी की टीम की पड़ताल में हुआ।
मरीजों ने बयां किया दर्द-
फोटो-03 शिवकली
चौरसी निवासी शिवकली ने बताया कि आंख बनवाई थी, तब लैंस के नाम पर पैसे लिए गए थे। इसके बाद दिखाने आए तो 1500 रुपये की दवा लिखी गई। अब अस्पताल पहुंचे तो 1000 रुपये की दवा लिख दी गई है। डॉक्टर साहब कहते हैं कि अंदर की दवा ठीक नहीं होती है, इसलिए बाहर की लिखी है।
फोटो- 04मदन
राहिया मदन ने बताया कि अम्मा को दिखाने आए थे। 1550 रुपये की दवा लिखी गई है। उधार पैसे लेकर दवा ली है। सरकारी अस्पताल में सिर्फ झूठा दावा किया जाता है कि मुफ्त इलाज है। इतनी महंगी दवाएं तो प्राइवेट अस्पतालों में भी नहीं मिलतीं। इन पर कोई रोक नहीं लगाता है।
फोटो-05 कृपाल
रसूलपुर के कृपाल सिंह ने बताया कि आंख बनवाने आए हैं। पहले 500 रुपये की दवा लिखी गई थी। अब 600 रुपये की बाहर की दवा लिखी है। उसको लेकर बैठे हैं। अब देखना है, आंख बनवाने में कितने रुपये लगते हैं।
फोटो-06 नीलम
दमरास निवासी नीलम ने बताया कि एक साल पहले आंख बनवाई थी। अब दिखाई नहीं देता है। यहां आए तो एक कर्मचारी ने प्राइवेट में मोनी मंदिर के पास जाने के लिए कहा है। इलाज किया नहीं, 500 रुपये की बाहर की दवा लिख दी। जब पूछा कि बाहर की दवा क्यों लिख दी गई तो कर्मचारी बोला दवा ले लो, यह नुकसान नहीं करती। आंख में डालती रहना है।
वर्जन-
अगर डॉक्टर बाहर की दवा लिख रहे हैं तो कार्रवाई की जाएगी। — एनडी शर्मा, सीएमओ