उरई (जालौन)। कोंच सरीखे छोटे से कस्बे से निकलकर मुंबई टेलीजगत व टीवी सीरियलों में अपनी पहचान बनाने वाले युवा पारसमणि अग्रवाल अब अपने नाम की तरह गांव-कस्बे के दूसरे युवाओं की प्रतिभा निखारने का काम कर रहे हैं। भारतीय जन नाट्य संघ इप्टा के सचिव पद पर काम करते हुए पारस अब युवाओं को अभिनय से लेकर तकनीकी से जुड़ी विधाओं से रूबरू करा रहे हैं।
पारस ने सोनी के लोकप्रिय टीवी सीरियल तारक मेहता का उल्टा चश्मा में बतौर सहायक साउंड डायरेक्टर की भूमिका अदा की। पारस का कहना है कि गांव कस्बों में भी प्रतिभाओं की कमी नहीं है, सिर्फ उन्हें पहचानने और उसे चमक देने की जरूरत है। जब वे मुंबई तक पहुंच सकते हैं तो दूसरा क्यों नहीं। बस इसी प्रयास को सार्थक करने के लिए वे समय समय पर रंगमंच को नई प्रतिभाएं देने के काम में जुटे हैं।
पारस ने बताया कि परास्नातक मास कम्युनिकेशन से करने के बाद लगा कि अभी आगे जहां और भी है तो उसी दौरान 2017-18 में उन्होंने अपना ब्लाग शुरू कियाए जिसका नाम इंटरव्यू एक्सप्रेस विद पारस जिसकी सीरीज हैलो मैं पारस बोल रहा हूं शुरू की। इस ब्लाग में उन्होंने मिस इंडिया रही गरिमा सिंह और भाभी जी घर पर है के रोहताश गौड़ (तिवारी जी) जैसे लोगों के अनुभव और विचारों को सामने लाने का काम किया।
इसी तरह धीरे धीरे दिल्ली और मुंबई के कलाकारों से संपर्क बढ़ा और इसका परिणाम यह रहा कि इसी साल फरवरी माह की शुरुआत में मुंबई पहुंचे। शुरुआत में न्यूज चैनल में एडिटिंग की, वहीं एक दोस्त के माध्यम से तारक मेहता सीरियल के साउंड डायरेक्टर शकील मंसूरी से मिलने का मौका मिला। उन्होंने ब्लाग, शिक्षा और न्यूज चैनल की एडिटिंग का काम देखा और अपने साथ रख लिया। सीरियल के कलाकार शूटिंग के वक्त जिस माइक का इस्तेमाल करते थे, उसकी मशीन की आपरेटिंग का काम उनके ही जिम्मे किया गया।
जिसे उन्होंने करीब एक माह तक यानि सीरियल 20-25 एपीसोड तक बखूबी किया। इसके बाद लॉकडाउन में उन्हें वापस आना पड़ा। अब जब सीरियल की शूटिंग फिर से चालू हो गई है तो शकील सर की काल भी आई लेकिन फिलहाल कोरोना को देखते हुए उन्होंने दीपावली तक की छुट्टी ले रखी है। अभी इसी साल जून माह में ही कोरोना काल के बीच कोंच फिल्म फेस्टिवल (आनलाइन)भी आयोजित किया। इसमें तीन देशों और भारत के 22 शहरों की प्रतिभाओं ने हिस्सा लेते हुए न सिर्फ फिल्म से जुड़ी जानकारी ही हासिल की बल्कि अपनी प्रतिभा को भी प्रस्तुत किया। बताकर खुशी हो रही है कि फेस्टिवल में हिस्सा लेने वाली लखनऊ की स्टूडेंट इशिता त्रिपाठी को इसी फेस्टिवल की वजह एक एलबम में काम करने अवसर मिला। भविष्य में आनलाइन नेशनल मीडिया कानक्लेव कराने का विचार है, ताकि कोंच की प्रतिभाओं को मौका मिलने के अलावा बुंदेलखंड की संस्कृति और विरासत दुनिया के सामने रखा जा सके।