मुहम्मदाबाद (जालौन)। निर्माण के दौरान सड़क की ऊंचाई ज्यादा होने से मुहम्मदाबाद गांव के खेतों की जलनिकासी बंद हो गई, जिससे नहर का पानी पुलिया से न निकलकर खेतों में जाने लगा। इसके चलते करीब 30 बीघा गेहूं व मटर की फसल जलमग्न हो गई। खेतों में बोई फसल की बर्बादी देखकर गुस्साएं किसानों ने पीडब्ल्यूडी के खिलाफ नारेबाजी की।
किसानों का कहना है कि जल्द मुआवजा न मिला और समस्या का निदान न हुआ तो वे डीएम से गुहार लगाएंगे। इसके बाद भी न्याय न मिला तो आंदोलन करेंगे। पीडब्ल्यूडी की ओर से उरई मुहाना मार्ग का निर्माण कार्य किया जा रहा है। सड़क की ऊंचाई बढ़ने से गांव के पानी की निकासी बंद हो गई है। पिछले साल विकल्प के रुप में पीडब्ल्यूडी ने पुलिया के नीचे पाइप डालकर जल निकासी की व्यवस्था की थी, लेकिन देखरेख के अभाव में बंद कर दिया गया।
शुक्रवार व शनिवार की रात कुसमिलिया गांव के मौजे से आए पानी से पंकज की तीन बीघा, हरमान, भगवानदास वर्मा, अशोक की दो-दो बीघा, जसीराम की तीन बीघा, विपिन की चार बीघा, कल्लू की चार बीघा, सुभाष व उमेश उपाध्याय की चार-चार बीघा, वीरेंद्र यादव की तीन बीघा समेत करीब तीस बीघा फसल जलमग्न हो गई। किसानों का आरोप है कि पिछली बार भी पानी भरने पर पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने समस्या का निदान कर दिया जाएगा, लेकिन कार्रवाई नहीं की गई।
बोले किसान
किसान पंकज ने कहा कि बंटाई पर खेत लिया था। किसी तरह कर्ज लेकर खाद बीज का इंतजाम कर बुआई की, लेकिन पानी ने फसल बर्बाद कर दी। पिछली साल का कर्ज अभी तक चुकता नहीं कर पाए हैं, एक बार फिर कर्ज की नौबत आ गई है।
किसान भगवान दास वर्मा ने कहा कि सड़क निर्माण के पानी निकासी के लिए जब पुलिया बनाई जा रही थी, तभी किसानों ने आपत्ति जताई थी, लेकिन पीडब्ल्यूडी ने अनसुनी कर दी। जिसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ रहा है।