उरई/आटा (जालौन)। आटा क्षेत्र में बच्ची के साथ दरिंदगी करने के दोनों आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर पुलिस ने ललितपुर की बच्चा जेल (बाल सुधार गृह) भेज दिया है। डीएम और एसपी ने गांव जाकर जानकारी ली और परिजनों को आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया।
आटा थाना क्षेत्र के एक गांव में बुधवार शाम करीब पांच बजे अनुसूचित जाति की पांच वर्ष की बच्ची से दो नाबालिग लड़कों ने सामूहिक दुष्कर्म किया था। ग्रामीणों ने उनकी पिटाई कर पुलिस के सुपुर्द कर दिया था। एएलएस (एडवांस लाइफ सपोर्ट) एंबुलेंस बच्ची को झांसी भेज दिया था, उसकी हालत में सुधार बताया गया है।
गुरुवार सुबह जिलाधिकारी डॉ मन्नान अख्तर और एसपी डॉ यशवीर सिंह बच्ची के गांव पहुंचे। दोनों अधिकारियों ने घटनास्थल करने के बाद परिजनों से मुलाकात कर घटना के संबंध में जानकारी ली और उन्हें उचित आर्थिक सहायता दिलाने का आश्वासन दिया। एहतियातन गांव और आरोपियों के घरों के बाहर पुलिस तैनात रही। एसपी ने बताया कि खलाफ दुष्कर्म, पाक्सो एक्ट और एससीएसटी एक्ट में मुकदमा दर्ज कर लिया है। आरोपियों को ललितपुर बच्चों की जेल भेज दिया गया है।
पुलिस एक और आरोपी को थाने लाई
बच्ची के परिजनों ने बुधवार रात पुलिस को तीन लोगों के खिलाफ तहरीर दी थी। पुलिस ने जांच के बाद दो नाबालिगों के खिलाफ ही रिपोर्ट दर्ज की थी। गुरुवार शाम पुलिस तीसरे 25 वर्षीय आरोपी को भी थाने ले आई है। आटा पुलिस का कहना है कि फिलहाल उससे पूछताछ की जा रही है।
जैसा किया वैसा ही भरेंगे
दोनों आरोपियों को देखने और उनका हाल जानने परिजन थाने भी नहीं गए। परिजनों ने बताया कि दोनों स्कूल नहीं जाते थे। अब जैसा किया है, वैसा ही भरेंगे। एक आरोपी की मां का 6 साल पहले निधन हो गया था।
बच्ची की मां और भाई सहमे
पिता बच्ची के साथ झांसी के अस्पताल में हैं। गांव में मां और सात वर्षीय बड़ा भाई हैं। घटना के बाद से दोनों डरे और सहमे दिखाई दिए। मां तो बार-बार ग्रामीणों से कह रही थी, न जाने किस हाल में होगी बिटिया।
ग्रामीणों बोले, कड़ी सजा मिले
ग्रामीणों में खासा आक्रोश दिखाई दे रहा है। उनका कहना है कि गांव में हत्या जैसी वारदात हुई हैं लेकिन इस मामले ने पूरे गांव को शर्मसार कर दिया है। दोषियों को कड़ी सजा मिलनी चाहिए।
मोबाइल का गलत इस्तेमाल न कर पाएं बच्चे
उरई। जनपद में नाबालिग अपराध की ओर कदम बढ़ा रहे हैं। दो माह पूर्व उरई शहर में शिक्षक की बेटी से सामूहिक दुष्कर्म के आरोपियों में एक नाबालिग था। बुधवार को आटा क्षेत्र में दो नाबालिगों ने मासूम से दुष्कर्म जैसी जघन्य वारदात को अंजाम दिया। चोरी और जेब काटने में कई नाबालिग पकड़े जा चुके हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार ऐसा सोशल मीडिया और मोबाइल के इस्तेमाल से हो रहा है।
मनोचिकित्सक डॉ अर्चना विश्वास का कहना है कि यह एक तरह से मानसिक बीमारी का लक्षण है। यह बीमारी सोशल मीडिया के कारण कम उम्र के बच्चों को शिकार बना रही है। लाकडाउन के कारण अब तो सात से सत्रह साल तक के नाबालिगों के हाथ में मोबाइल हैं। बच्चे मोबाइल का कितना इस्तेमाल पढ़ाई में और कितना पबजी, वेब सीरीज सरीखी अन्य चीजों में कर रहे हैं यह अभिभावकों के लिए जानना जरूरी है।
मनोचिकित्सक डॉ तारा सहजानंद ने कहा कि इस बीमारी को मीनिया कहा जाता है। इसमें गुस्सा आना, हिंसक हो जाना और दिमाग एकदम से हो जाता है। अभिभावक देखें कि यदि अचानक बच्चे के स्वभाव चिड़चिड़ापन, गुस्सा आदि बदलाव आ रहा है तो तत्काल उसकी काउंसिलिंग करानी चाहिए।
भाषणों में नहीं, हकीकत में दिखे मिशन शक्ति
उरई। प्रदेश सरकार ने नारी सुरक्षा के लिए मिशन शक्ति अभियान शुरू किया है। इसके बाद भी दुष्कर्म, छेड़खानी और अश्लीलता करने के रोजाना तीन चार मामले थानों में दर्ज हो रहे हैं। समाजसेवी महिलाओं और अभिभावकों का तर्क है कि मिशन शक्ति को भाषणों तक सीमित रखने के बजाए अमल में जाएं तभी महिलाओं के साथ अपराध रुकेंगे।
सभी का जागरूक होना जरूरी
मानवाधिकार संगठन से जुड़ी उरई की स्वयंप्रभा दुबे का कहना है कि मिशन शक्ति हो या अन्य अभियान, पहले उसके प्रति जागरुकता जरूरी है। सभी को एकजुट होकर काम करना होगा, तभी महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों पर कमी आ सकती है।
गलत लोगों पर नजर भी रखे पुलिस
कोंच की महिला समाजसेवी अंजू शर्मा का कहना है कि महिलाओं के साथ हिंसा करने वालों की निगरानी होनी चाहिए। जेल से छूटने के बाद ऐसे लोगों पर नजर रखने के साथ उनमें सुधारने लाने का प्रयास किया जाए तो घटनाएं घट सकती हैं।
सख्ती दिखाए प्रशासन
कालपी की प्रवक्ता अपर्णा शर्मा का कहना है कि मिशन शक्ति उपयोगी अभियान है। इसका सही ढंग से पालन कराने के लिए पुलिस को थोड़ी सख्ती दिखानी पड़ेगी, तभी अपराधियों में भय व्याप्त होगा।
बच्चों पर नजर रखें अभिभावक
उरई की गुंजन द्विवेदी का कहना है कि अभिभावकों को बेटे और बेटी पर नजर रखनी चाहिए। उनके साथ दोस्तों की तरह व्यवहार करें। इससे उन्हें बुराई की तरफ बढ़ने से रोकने में मदद मिलेगी। हर अभियान भी सफल होगा।