एट (जालौन)। । अन्ना जानवरों से जूझ रहे किसानों की फसलों पर अब कीटों का प्रकोप शुरू हो गया है। मौसम में आए बदलाव के कारण मटर की फसल में इल्ली कीट लगने लगा है। ये कीट फसल को चट कर रहा है। कीट की समस्या से किसान परेशान हैं।
एट क्षेत्र में हजारों एकड़ में मटर की फसल बुआई गई है। फसल में फूल आना शुरू हो गया है। फसल में इल्ली कीट लग गया है। इससे किसान परेशान हैं। किसानों ने कीटनाशक का छिड़काव शुरू कर दिया है लेकिन उसका ज्यादा असर दिखाई नहीं दे रहा है। किसानों ने बताया कि एट की ज्यादातर दुकानों में जरूरत के अनुसार कीटनाशक भी नहीं मिल पा रहा है। किसानों को कोंच, जालौन, झांसी और कानपुर से कीटनाशक मंगाना पड़ रहा है।
किसानों की जुबानी, उनकी परेशानी
किसान रामपाल पटेल ने बताया कि रात दिन रखवाली कर किसी तरह अन्ना जानवरों से फसल बचाई, अब कीट लग गया है। दिन में धूप तेज होने से भी फसल को नुकसान हो रहा है।
ढगवा कला के किसान पवन ने बताया कि अन्ना जानवरों से फसल बचाने के लिए बैंक से कर्ज लेकर खेत के चारों तो तार बांधे। अब कीटनाशक छिड़काव के लिए साहूकारों से कर्ज लेना पड़ रहा है।
किसान वाहिद काजी ने बताया कि कीट का प्रकोप बढ़ता ही जा रहा है। ऐसा लग रहा है कि कुछ नहीं बचेगा। मौसम बदले तो ही कुछ हो सकता है। कृषि अधिकारियों को खेतों पर जाकर देखना चाहिए।
सलाह लेकर ही कीटनाशक का छिड़काव करें
कृषि वैज्ञानिक रजनीश चंद्र मिश्रा ने बताया कि एकड़ पांच में फेरोमन ट्रैप, स्पिनोसैड 45 एससी 200 मिली प्रति हेक्टेयर, फ्लूबेंडमिड 100 मिली प्रति हेक्टेयर, इंडोक्सकैरब 50 मिली प्रति हेक्टेयर, इमामेक्टिन बेंजोएट 5 एसजी 250 ग्राम प्रति हेक्टेयर में छिड़काव करने से इल्ली से निजात मिल सकती है। छिड़काव करने से पहले किसान नजदीकी कृषि वैज्ञानिक से सलाह जरूर ले लें।