उरई। अब रेलवे में भी मनरेगा से काम शुरु हो गया। जिले में मनरेगा मजदूरों ने पहला काम झांसी कानपुर रेलवे ट्रैक के उरई भुआ सेक्शन के रिनियां बड़ागांव के बीच किया। पहले दिन 22 मनरेगा मजदूरों ने काम किया, इनमें छह प्रवासी मजदूर भी शामिल है। इन मजदूरों को रोजाना 201 रुपये का भुगतान किया जाएगा।
झांसी-कानपुर रेलवे ट्रैक के दोहरीकरण का काम चल रहा है। कोरोना संक्रमण के दौर में मुंबई, हैदराबाद, सूरत, दिल्ली, जालंधर से कई प्रवासी मजदूर कामकाज छोड़कर घर आ गए है। घर में काम न मिलने से प्रवासी मजदूरों के सामने रोजी रोटी का बड़ा संकट है। ऐसे मजदूरों को रेलवे ने काम देने का निर्णय लिया है। इसके तहत उरई
भुआ सेक्शन में चल रहे दोहरीकरण के काम में रिनियां और बड़ागांव के 22 मजदूरों को रेलवे ने ट्रैक के किनारे मिट्टी भराई के काम में लगाया है। इन मजदूरों को एक दिन में एक मीटर लंबी-चौड़ी जगह को समतल करना है। मिट्टी की भराई 70 सेंटीमीटर तक रहेंगी। इस काम के लिए प्रति श्रमिक 201 रुपये का भुगतान होगा। काम की
देखरेख के लिए रेलवे ने भी अपने एक सुपरवाइजर ज्ञानेश पटेल की तैनाती कर दी है। वह रोजाना काम की रिपोर्टिंग अधिकारियों तक करेगा। 2018-19 में भी रेलवे ने मनरेगा से काम कराने की बात कही थी। उस समय 175 रुपये दिए जाने का प्रावधान था और सुबह नौ बजे से पांच बजे तक काम करना होता था। लेकिन तब मजदूर न मिलने के कारण यह काम नहीं हो पाया था। अब बड़ी संख्या में प्रवासी मजदूर लौटे है और गांव में भी काम कम मिल रहा है। ऐसे में मजदूर 201 रुपये में काम करने को तैयार हो गए हैं।
डकोर ब्लाक के जेई रमेश चंद्र वर्मा का कहना है कि इस ट्रैक पर 2.76 किलोमीटर का होना है। इसके लिए रेलवे की ओर से 52 हजार रुपये की धनराशि स्वीकृत की गई है। पहले मजदूरों को 175 रुपये का भुगतान मिलता था, लेकिन इस काम के लिए मजदूरों को 201 रुपये का भुगतान किया जाएगा। अब समय की पाबंदी भी नहीं है। उन्हें सिर्फ साठ घन फुट खुदाई या भराई करनी है।
गुजरात में 16 हजार वेतन मिलता था
फोटो-4- बड़ागांव निवासी प्रवासी मजदूर प्रवेश कुमार ने बताया कि वह कच्छ (गुजरात) एक दवा कंपनी में काम करता है। वहां 12 घंटे ड्यूटी करने के बाद 16 हजार रुपये वेतन मिलता था। कोरोना संक्रमण के चलते कंपनी ने आधे कर्मचारियों को काम पर नहीं बुलाया है। ऐसे में वह परिवार चलाने के लिए मनरेगा योजना में जुड़कर काम कर रहा है। यदि कंपनी से बुलावा आता है तो वह फिर वहां काम करने चला जाएगा।
हवाई अड्डे पर किया साफ-सफाई का काम
फोटो-5- धर्मेंद्र कुमार ने बताया कि वह दिल्ली में इंदिरा गांधी अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे पर एक कंपनी के अंडर में सफाई कर्मचारी के रुप में काम करते थे। वहां उसे 23 हजार रुपये महीने वेतन मिलता था। लाकडाउन के चलते हवाई सेवाएं बंद हो गई है तो उसका काम भी बंद हो गया। ऐसे में वह गांव आ गया। छह सदस्यीय परिवार का पेट पालने के लिए पत्नी समेत मनरेगा तहत काम कर रहे है।
इन जिलों में रेलवे कराएगी मनरेगा से काम
जालौन, झांसी, ललितपुर, बांदा, चित्रकूट, हमीरपुर, महोबा, उन्नाव, कानपुर देहात समेत यूपी के 21 जिले शामिल है। पूरे देश में 116 जिले मनरेगा के तहत मानव दिवस आयोजित करने के लिए चिह्नित किए गए हैं।