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Jalaun News: अपनों के लिए खोल दी पंचायत की तिजोरी

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फोटो - 23 प्रधान द्वारा अपने खाते में की गई भुगतान की रसीद। शिकायतकर्ता।
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उरई। माधौगढ़ विकासखंड की ग्राम पंचायत कासिमपुर में पंचायत निधि में लाखों रुपये का खेल किया गया। आरोप है कि प्रधान ने बेटे को गोपालक बनाकर लाभ दिया। एक ही अवधि में मानदेय पाने वाली केयर टेकर को मनरेगा की मजदूरी दी गई।
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ग्राम प्रधान रमाकांति के निजी बैंक खाते में जुलाई 2021-22 से नवंबर 2024-25 तक कुल 9,11,355 रुपये ट्रांसफर किए गए। पंचायत निधि से होने वाले भुगतान सामान्यतः संबंधित श्रमिकों, फर्मों या अन्य पात्र व्यक्तियों के खातों में किए जाने चाहिए। ऐसे में प्रधान के निजी खाते में इतनी बड़ी धनराशि पहुंचना वित्तीय अनियमितता माना जाता है।
पंचायत में गोवंश संरक्षण के लिए होने वाले खर्च के बीच प्रधान के पुत्र मनीष को गोपालक के रूप में भुगतान किए जाने का मामला भी सामने आया है। विवरण के मुताबिक प्रधान पुत्र मनीष को 21 जनवरी 2023 से 18 नवंबर 2024 तक गोपालक के रूप में कुल 64,694 रुपये दिए गए। इसके अतिरिक्त 17 अगस्त 2025 को मरम्मत कार्य के नाम पर उसके खाते में 12,776 रुपये का भुगतान किया गया। एक ही परिवार के सदस्य को गोपालक के रूप में भुगतान और अलग से मरम्मत कार्य की रकम दिया जाना नियमों के विरुद्ध है।
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सामुदायिक शौचालय की देखरेख के लिए तैनात केयर टेकर मुन्नी देवी को पंचायत निधि से 5 जुलाई 2021 से 17 मार्च 2026 तक कुल 3,24,000 रुपये मानदेय के रूप में दिए जाने का विवरण है। इसी के साथ जॉब कार्ड संख्या यूपी38-003-024-002-52 के माध्यम से मुन्नी देवी को मनरेगा में श्रमिक के तौर पर 7,500 रुपये का भुगतान भी दर्ज है। एक ही समय में दो काम कैसे कर लिए, यह सवालों के घेरे में है।
गोपालक को दूसरे कामों के नाम पर भी 1.41 लाख रुपये
भुगतान के विवरण में गोपालक विकास का नाम भी सामने आया है। विकास को 21 मार्च 2025 से 7 अगस्त 2026 तक मानदेय के रूप में 1,14,997 रुपये दिए गए। इसके अलावा 14 जनवरी 2026 से 7 अगस्त 2026 के बीच पंचायत के अन्य कार्यों के नाम पर उसके खाते में 1,41,434 रुपये का भुगतान भी दर्ज है। इस तरह दोनों मदों में उसे कुल 2,56,431 रुपये दिए जाने का विवरण है।
धन्यवाद शो के भुगतान में भी निजी खाते का जिक्र
गांव में आयोजित धन्यवाद शो कार्यक्रम के लिए ग्राम प्रधान ने राजेश को 1,11,122 रुपये का भुगतान पंचायत निधि के बजाय अपने निजी खाते से किया। इस प्रविष्टि को भी बाकी भुगतान के साथ जोड़कर देखना जरूरी है। कार्यक्रम किस मद से स्वीकृत हुआ था, वास्तविक खर्च कितना था, भुगतान का स्रोत क्या था और प्रधान के निजी खाते से रकम दिए जाने के पीछे क्या परिस्थितियां थीं, ये सवाल अहम हो जाते हैं।
भुगतान की पूरी कड़ी की जांच जरूरी
गांव निवासी शशिकांत की शिकायत पर मामले की जांच शुरू कर दी गई है। उनका कहना है कि पंचायत निधि से प्रधान के निजी खाते में ट्रांसफर, प्रधान के पुत्र को गोपालक और मरम्मत कार्य के नाम पर भुगतान, केयर टेकर के नाम पर मानदेय और मनरेगा की मजदूरी तथा गोपालक को अतिरिक्त मदों में रकम दिए जाने की पूरी कड़ी की जांच जरूरी है। संबंधित अवधि के बैंक स्टेटमेंट, कैशबुक, भुगतान रजिस्टर, मनरेगा मस्टर रोल, जॉब कार्ड, गोशाला के अभिलेख, कार्यस्थल सत्यापन और बिल-वाउचर का मिलान कराया जाए तो यह स्पष्ट हो जाएगा कि भुगतान नियमों के तहत नहीं हुआ।
वहीं सीडीओ केके सिंह का कहना है कि मामला संज्ञान में नहीं है, अगर इस तरीके से भुगतान हुआ है, तो इसकी जांच कराई जाएगी और जांच में मामला सही पाए जाने पर कार्रवाई की जाएगी।
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