फोटो - 01 मां शीला देवी की गोद में मासूम धीरज। फाइल फोटो
जालौन। बेटे को बचाने के लिए कर्ज लिया, मकान तक दांव पर लगा दिया, लेकिन पिता प्रदीप कुमार की जिंदगी ही छिन गई। अब जिस नौ माह के धीरज के इलाज के लिए वह आर्थिक संकट से जूझ रहे थे, उसकी भी मौत हो गई। पिता के बाद बेटे को खोने से मां शीला देवी और परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
कोतवाली क्षेत्र के मोहल्ला सहावनाका निवासी प्रदीप कुमार मजदूरी कर परिवार का भरण-पोषण करते थे। परिवार में पत्नी शीला देवी, पांच बेटियां कविता, दीक्षा, ललिता, छुटकी और छोटी तथा दो बेटे केशव और धीरज थे। धीरज काफी समय से बीमार था। उसके इलाज के लिए प्रदीप ने मोहल्ला घुआताल निवासी राजबहादुर यादव से दो लाख रुपये उधार लिए और इसके एवज में मकान का मुहायदा कर दिया। आरोप है कि बाद में उन्हें मकान के रुपये नहीं मिले।
परिजनों के मुताबिक, 14 अगस्त को प्रदीप ने रुपये मांगे तो उनके साथ गाली-गलौज कर उन्हें भगा दिया गया। इससे परेशान होकर प्रदीप ने 15 अगस्त की रात फंदा लगाकर जान दे दी। आत्महत्या से पहले बनाए गए वीडियो में उन्होंने संबंधित लोगों पर रुपये न देने और धोखाधड़ी करने के आरोप लगाए थे। पुलिस ने 20 अगस्त को आरोपी राजबहादुर यादव को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश किया था।
ग्वालियर से दिल्ली ले जाने की थी तैयारी
प्रदीप की मौत के बाद भी धीरज का इलाज जारी रहा। उसका ग्वालियर में उपचार चल रहा था। 24 अक्तूबर को हालत गंभीर होने पर चिकित्सकों ने उसे दिल्ली ले जाने के लिए रेफर कर दिया। परिजन उसे आगे के उपचार के लिए ले जाने की तैयारी कर रहे थे, तभी अस्पताल के गेट के बाहर ही मासूम ने दम तोड़ दिया।
धीरज की मौत से शीला देवी के सामने पति और बेटे को खोने का असहनीय दुख है। परिवार में पांच बेटियों और बड़े बेटे केशव के साथ अब उन्हें आर्थिक संकट के बीच बच्चों की जिम्मेदारी भी संभालनी है।