उरई। जिलेे के ग्रामीण क्षेत्र में मंगलवार रात से हो रही लगातार बारिश ने जहां किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें बढ़ा दी हैं, तो वही दूसरी और झमाझम बारिश से कई गांव व कस्बों जलभराव की स्थिति बन गई। वहीं लगातार बारिश से खरीफ की फसल तिल, बाजरा, मूंग व उर्द आदि की फसल को नुकसान हुआ है। वहीं, धान के किसानों को इस बारिश से लाभ भी हुआ है, लेकिन जिले में सिर्फ 10 प्रतिशत ही किसान धान की फसल को बोते हैं। अधिकांश हिस्सों में अन्य की बुआई होती है, जिससे किसान परेशान हैं।
सरावन में कस्बे में बुधवार सुबह 10 से 2 बजे तक लगातार हुई तेज बारिश से आम जनजीवन अस्त व्यस्त हो गया। लगभग 5 घटे की बारिश ने खरीफ की फसल को बर्बाद कर दिया। काफी समय बाद किसानों को अच्छी खरीफ फसल की उम्मीद थी। इसमें ज्वार, बाजरा, तिल, मूंग की फसल बोई थी, लेकिन बारिश ने फसल नष्ट कर दी। खेतों लबालब पानी भरा है। वहीं दूसरी तरफ, बारिश से मजरा वदनपुरा के प्राथमिक विद्यालय में पानी भर गया, इसके साथ गांव की गलियों में भी जलभराव हो गया, जिससे लोगों का घरों मे पहुंचना मुश्किल हो गया। ग्रामीण मुस्लिम खा, इमरान खा, शकील, मुस्तफा पहलवान, इमरान शौकीन खा आदि का आरोप है कि बारिश से पहले ही प्रधान से गांव के नाला सफाई कराने की मांग की गई थी, लेकिन प्रधान ने ध्यान नहीं दिया, जिससे पहली ही तेज बारिश में गांव में जगह-जगह जलभराव हो गया।
सिरसा कलार में मंगलवार रात से रुक रुककर हो रही बारिश ने क्षेत्र के किसानों की नींद उठा दी है। स्थिति यह है कि बारिश से खरीफ की फसल को सड़ने की कगार पर पहुंच गई है। किसानों का कहना है कि ज्यादा बारिश से हाल में हुई बाजरा की बुआई को सबसे ज्यादा नुकसान है, केवल धान की फसल को ही फायदा है, लेकिन क्षेत्र में धान की फसल नाम मात्र की है, अधिकांश किसान खरीफ की अन्य फसलों की बुआई करते है। क्षेत्र में मंगलवार से हो रही तेज बारिश से, जहटौली, मलथुआ, दमरास, जखा, सिरसकलार, भिटारी सहित कई गांवों में खरीफ की फसल वर्षा के पानी से जलमग्न है। किसान कैलाश सिंह, दयाल मिश्रा, बाजीद खां, भूरेलाल, तुलसीराम आदि का कहना है, कि तेज बारिश से सबसे ज्यादा तिल की फसल को नुकसान है, तिल का पौधा अधिक पानी से सड़ जाता है। उर्द, ज्वार, बाजरा सभी जलमग्न है, अगर अब और बारिश होती है तो इन फसलों को भी खतरा है।
रामपुरा में देर रात से निरंतर हो रही बारिश से किसानों के माथे पर चिंता की लकीर साफ देखी जा सकती हैं। अधिकांश किसानों ने बड़ी आस से बाजरा, तिल, मसूर व मूंग की। फसल की बुआई दो, तीन दिनों पहले की थी, खेतो में अभी अंकुर फूटे भी नहीं थे कि बरसात ने किसानों को दुविधा में डाल दिया। किसान अरविंद, गोविंदास, नीलू, पवन, मोनू आदि लोगों ने बताया कि दो दिन पहले ही खेतों की बुआई करकर निपटे हैं। जिसके बाद रात से निरंतर हो रही बरसात ने चिंता में डाल दिया। खेतों में अब पानी भर गया, जिससे फसल को नुकसान हो सकता हैं। महंगाई के दौर में खेत की एक बार जुताई व बुआई करना मुश्किल हो जाता हैं। अब बरसात के कारण फसल होने की उम्मीद भी टूटती जा रही हैं। अब तो लगता है कि दोबारा ही बुआई करनी पड़ेगी।