एट कस्बे में घूमता अन्ना मवेशियों का झुंड।
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उरई। जनपद में भले ही सैकड़ों स्थाई और अस्थाई गोशालाएं बनकर तैयार हो गई हो लेकिन किसानों को अभी अन्ना मवेशियों की समस्या से निजात नहीं मिल रही है। इस कारण किसानों को अभी भी रात-दिन खेतों में रखवाली करनी पड़ रही है। इसके बाद भी मौका मिलते ही मवेशी फसलों को नष्ट कर रहे हैं। मवेशियों का झुंड का झुंड खेतों और हाईवे पर घूमता नजर आता है। कुछ ग्रामीण इलाकों में तो मवेशियों को लेकर लोगों के बीच विवाद की भी स्थिति बनी हुई है। वहीं दूसरी ओर प्रशासन के अधिकारियों का कहना है कि गोशालाओं में साल भीतर काफी काम हुआ है। कई गोशालाओं में चारे पानी के साथ साथ मवेशियों को सर्दी गर्मी से बचाने के लिए भी पर्याप्त इंतजाम किए गए हैं। जिन गोशालाओं में अभी भी कुछ कमियां हैं, उन्हें दूर करने के लिए जल्द प्रयास भी किए जाएंगे।
मजरा खितौली में अभी भी गोशाला अधूरी पड़ी हुई है। चारे पानी का कोई इंतजाम न होने के कारण मवेशी भी नहीं ठहरते हैं। 500 से अधिक मवेशी आए दिन किसानों की फसल चट कर रहे हैं। रबी के सीजन में करीब 200 बीघा गेहूं और मटर की फसल अन्ना मवेशियों की भेंट चढ़ चुकी है। सरावन, वदनपुरा, नरायणपुरा, दौलतपुरा आदि गांवों के किसान मवेशियों की समस्या से जूझ रहे हैं। किसान राजेश कुमार, सुरेंद्र, करन सिंह, महेश कुमार आदि का कहना है कि कई बार माधौगढ़ एसडीएम से शिकायत की गई लेकिन सिवाय आश्वासन के कुछ और हाथ नहीं लगा। संवाद
ग्राम पंचायत को भले ही नगर पंचायत का दर्जा मिल गया हो लेकिन आठ माह से बन रही गोशाला अभी भी आधा अधूरी ही है। यहां चारे पानी की कोई व्यवस्था नहीं है, इतना ही नहीं सर्दियों से बचाने को तिरपाल तक नहीं है। चौकीदार न होने से किसान स्वयं ही मवेशियों को गोशाला में बंद करते और छोड़ते हैं। निर्माण के नाम पर सिर्फ चारों ओर तार बंधे नजर आते हैं और एक छोटा सा कबाड़ हो रहा गेट ही लगा हुआ है। किसानों का कहना है कि दिन भर मवेशियों की भीड़ बाजारों और हाईवे पर घूमती है और शाम के वक्त उनका रुख खेतों की ओर हो जाता है।