उरई। जिला अस्पताल में इलाज के लिए आए मरीजों को घंटों लाइन में खड़ा रहना पड़ रहा है। इस समय अस्पताल में मरीजों की भीड़ उमड़ रही है। कई मरीजों ने कहा कि पर्चा बनवाने के लिए घंटों लग जाते है, फिर कैसे डॉक्टर को दिखाएंगे और कैसे जांचें और इलाज होगा।
जिला अस्पताल में रोजाना 1100 से 1300 तक मरीज आ रहे हैं। इन मरीजों को पर्चा बनवाने से लेकर डॉक्टर तक पहुंचने में घंटों इंतजार करना पड़ा। ऑनलाइन पर्चा सिस्टम होने से अस्पताल की व्यवस्थाएं गड़बड़ा गई है। अब हालत यह है कि ऑनलाइन सिस्टम के चलते जल्दबाजी में मोबाइल और आधारकार्ड न लाने वाले मरीज मायूस होकर लौट रहे हैं।
रोजाना मरीजों के मायूस होकर वापसी की शिकायतें अधिकारियों से लेकर नेताओं तक भी पहुंच रही है लेकिन अस्पताल प्रशासन इस बारे में कुछ सुनने को तैयार नहीं है। मरीजों से स्टाफ कह देता है कि शासन के निर्देश पर आभा आईडी के माध्यम से पर्चे बनाए जा रहे है। साथ ही ऑनलाइन सिस्टम से फर्जीवाड़ा रूकेगा। लेकिन जो मरीज ग्रामीण क्षेत्रों से आ रहे है या जिनके पास मोबाइल और आधारकार्ड नहीं है तो वह परेशान होकर भटक रहे है और बिना इलाज के वापस जा रहे हैं।
50 किलोमीटर दूर कदौरा से कमलेश व बरखेरा से आए सोनू ने बताया कि सुबह आ गए थे। मोबाइल भी लिए है लेकिन ऑनलाइन सिस्टम के चलते इतनी लंबी लाइन लगी है कि पता नहीं कब नंबर आएगा और कब दिखाएंगे। यदि पर्चा बनने पर इलाज नहीं मिल पाया तो पचास किलोमीटर आना-जाना बेकार हो जाएगा। व्यक्ति की स्थिति देखकर सिस्टम बनाना चाहिए। नया सिस्टम अस्पताल प्रशासन के लिए भले ही लाभकारी हो लेकिन मरीजों के लिए परेशानी का सबब बन गया है।
मरीज व तीमारदारों की पीड़ा पर गौर कीजिए
कोंच के भेड़ से आए मानवेंद्र ने बताया कि उनकी पत्नी को टीबी के शुरुआती लक्षण है। अन्य जांच के लिए कहा गया तो वह जिला अस्पताल के पर्चा काउंटर पर पहुंचे लेकिन मोबाइल न होने के कारण उनका पर्चा नहीं बन पाया। हालांकि आधारकार्ड था पर कहा गया कि मोबाइल भी होना चाहिए तभी पर्चा बनेगा। उन्होंने बताया कि वह मंगलवार को भी आए थे और आज बुधवार को मोबाइल लेकर आए लेकिन इतनी लंबी लाइन है कि कब पर्चा बनेगा और कब जांचें होगी और रिपोर्ट मिलेगी। आज का दिन भी बेकार चला गया। अस्पताल प्रशासन को हम लोगों की पीड़ा पर गौर करना चाहिए।
मोबाइल न लाने पर बेटी को लेकर रहे भटक
उमरारखेरा निवासी रोमा ने बताया कि उनकी 13 साल की बेटी आभा कांशीराम कॉलोनी में अपनी बुआ के यहां थी। मंगलवार से उल्टी दस्त शुरू हो गए। जब उसने सूचना मिली तो वह कांशीराम कालोनी से सीधे जिला अस्पताल आ गई। जल्दबाजी में वह मोबाइल लेकर नहीं आ पाई और उसका पर्चा नहीं बन पा रहा है। बेटी के साथ भटक रहे है। इस पर उसने इमरजेंसी वार्ड में जाकर दिखाया। उसने बिना मोबाइल के पर्चा न बनने के सिस्टम को गलत बताया।
गिरी ओपीडी मरीजों की संख्या, विधायक भी जता चुके हैं नाराजगी
जिला अस्पताल में आभा सिस्टम लागू होने से ओपीडी में मरीजों की संख्या गिर गई है। पिछले महीने के मुकाबले इस महीने करीब साढ़े चार हजार मरीज कम हुए हैं। कई मरीजों का कहना है कि मोबाइल के चक्कर में वह बिना इलाज के लौट गए हैं। पिछले दिनों सदर विधायक गौरीशंकर वर्मा ने भी इस तरह के सिस्टम पर जिला अस्पताल के सीएमएस से नाराजगी जाहिर की थी।
वर्जन
शत प्रतिशत आभा आईडी बनाने के शासन के आदेश है। जिला अस्पताल में 80 फीसदी पर्चे ऑनलाइन बनाए जा रहे हैं। चार आभा और एक मैनुअल काउंटर है। 8 से 10 स्टाफ की भी ड्यूटी मरीजों की मदद के लिए लगाई गई है। अगर मरीजों को दिक्कत हो रही है तो इस पर विचार किया जाएगा। -डॉ. आनंद उपाध्याय, सीएमएस