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Jalaun News: प्याज ने किसानों की आंखों में ला दिए आंसू

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फोटो - 17 खेत में खड़ी सूखती प्याज की फसल। संवाद
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कोंच। तहसील क्षेत्र के किसानों के लिए इस बार प्याज की खेती घाटे का सौदा साबित हो रही है। कभी बेहतर मुनाफे की उम्मीद में खेतों में लगाई गई प्याज अब किसानों की आंखों में आंसू ला रही है। हालात इतने खराब हैं कि कई किसानों ने खेतों में खड़ी फसल ही छोड़ दी है, जबकि कई जगह उखाड़ी गई प्याज की बोरियां कई दिनों से खेतों में पड़ी-पड़ी खराब हो रही हैं।
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तहसील क्षेत्र के ग्राम भेड़, रवा, पचीपुरा, खनुआ, छानी, रनुआ और धनौरा समेत आसपास के गांवों में बड़ी संख्या में किसान प्याज की खेती पर निर्भर हैं। यहां के अधिकांश किसानों की सालभर की उम्मीद इसी फसल से जुड़ी रहती है, लेकिन इस बार मौसम की मार और बाजार में गिरते दामों ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों ने बताया कि पिछले दिनों हुई ओलावृष्टि और लगातार बारिश से करीब 90 प्रतिशत फसल प्रभावित हो गई। प्याज में दाग लगने और गुणवत्ता खराब होने के कारण व्यापारी खरीदने से बच रहे हैं।
मजबूरी में किसान 5 से 6 रुपये किलो के भाव में प्याज बेच रहे हैं, जबकि एक बीघा प्याज की खेती में 25 से 30 हजार रुपये तक की लागत आती है। ग्रामीण किसानों का कहना है कि वर्तमान दामों में तो खोदाई और मजदूरी का खर्च तक नहीं निकल पा रहा है। जिन किसानों ने खेत किराये या जुताई पर लेकर खेती की थी, उनकी स्थिति और अधिक खराब हो गई है। कई किसानों ने नुकसान से टूटकर प्याज की खोदाई ही बंद कर दी, जबकि कई खेतों में 15-20 दिनों से प्याज की बोरियां पड़ी हैं और धीरे-धीरे खराब हो रही हैं। किसानों का दर्द है कि मेहनत, समय और पूंजी लगाने के बाद भी उन्हें लागत तक नहीं मिल पा रही।
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डेमेज प्याज का नहीं हो पा रहा भंडारण



फोटो- 19 किसान गोविंद नारायण।



किसान गोविंद नारायण का कहना है कि खेत जुताई पर लेकर 45 बीघा में प्याज बोई थी लेकिन इस बार की फसल ने बर्बाद कर दिया है। बारिश और ओलावृष्टि से खराब हुआ प्याज दागी हो गया हैं, जिसके कारण कोल्ड स्टोर व व्यापारी भंडारण करने से बच रहे हैं। उनका कहना है कि भंडारण न होने से उन्हें मजबूरी में औने-पौने दामों पर प्याज बेचनी पड़ रही है।





मजदूरों की मजदूरी तक देना हो रहा मुश्किल



फोटो-20 किसान रंजीत।



किसान रंजीत ने बताया कि प्याज की खुदाई और तैयार करने में भारी खर्च आता है, लेकिन बाजार में दाम इतने कम हैं कि मजदूरों का भुगतान करना भी मुश्किल हो गया है। कई किसान उधार लेकर मजदूरी चुका रहे हैं।





150 खुदाई, 20 की बोरी, 5 सिलवाई... किसान के हाथ खाली


फोटो-21 किसान कृष्णकांत बाजपेई।



किसान कृष्णकांत बाजपेई का कहना है कि एक बोरी प्याज तैयार करने में ही खर्च निकल जा रहा है। खुदाई, छंटाई, बोरियों की सिलाई और ढुलाई के बाद जब प्याज 5-6 रुपये किलो बिक रही है, तो मेहनत का कोई मोल नहीं बचा। कहा कि पूरे सीजन की मेहनत के बाद अब हाथ में सिर्फ नुकसान और मायूसी रह गई है।

फोटो - 17 खेत में खड़ी सूखती प्याज की फसल। संवाद

फोटो - 17 खेत में खड़ी सूखती प्याज की फसल। संवाद

फोटो - 17 खेत में खड़ी सूखती प्याज की फसल। संवाद

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