सामूहिक विवाह कार्यक्रम जहां फिजूलखर्ची पर रोक लगाते हैं, वहीं समाज के लोगों को जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। यह परंपरा अमीरी-गरीबी की खाई को पाटती है। वास्तव में इस प्रकार के आयोजन समाज के लिए ऐतिहासिक कदम हैं। यह बात मछुआ समाज के प्रथम सामूहिक विवाह कार्यक्रम के दौरान मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित पूर्व बसपा जिलाध्यक्ष मूलचंद्र निषाद ने कही। इस दौरान नौ जोड़े एक साथ जीने मरने की कसम खाकर वैवाहिक बंधन में बंधे।
श्रीमती विमला देवी शिक्षा प्रसार समिति के तत्वावधान में आयोजित प्रथम सामूहिक विवाह महायज्ञ सामरोह में कार्यक्र्तम का शुभारंभ मुख्य अतिथि पूर्व बसपा जिलाध्यक्ष मूलचंद्र निषाद व विशिष्ट अतिथि सपा जिलाध्यक्ष चौधरी धीरेंद्र यादव, युवजन सभा जिलाध्यक्ष सिद्धार्थ यादव द्वारा संयुक्त रूप से देवी-देवताओं की पूजा-अर्चना तथा चित्र पर माल्यार्पण कर किया गया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कल्याण सिंह बाथम ने कहा आदर्श विवाह कार्यक्रम जहां फिजूलखर्ची पर रोक लगाते हैं। वहीं, समाज के लोगों को जोड़ने में भी अहम भूमिका निभाते हैं। आज समय की आवश्यकता है कि हम लोग ऐसे आयोजनों को महत्व तथा प्रोत्साहन दें। ऐसे कार्यक्रमों के आयोजन से समाज को आगे बढ़ाने में अहम भूमिका निभाएं।
मुख्य अतिथि ने कहा कि यह परंपरा अमीरी-गरीबी की खाई को पाटती है। वास्तव में इस प्रकार के आयोजन समाज के लिए ऐतिहासिक कदम हैं। वहीं, इस सामूहिक विवाह के संयोजक भूपेश बाथम ने कहा कि अभी मछुआ समाज का यह पहला सामूहिक विवाह कार्यक्रम है। लेकिन इस कार्यक्रम की सफलता को देखते हुए कार्यकारिणी आगे भी ऐसे आयोजन करती रहेगी। सामूहिक विवाह महायज्ञ के दौरान 9 जोड़ों ने सुख-दु:ख एवं हर परिस्थिति में एक-दूसरे के साथ जीवन-यापन करने तथा पति-पत्नी के दायित्वों का निर्वहन करने की शपथ ली।
इस मौके पर मुकेश दुबे, नेतसिंह निरंजन, अरविंद्र कुमार खरे, सुबोध प्रजापति, कालीचरण, आशीष कुमार, प्रदुम्न कुमार निरंजन, राधाचरण, पवन उरई, रामसेवक, श्रीमती सुषमा, डॉ. मनोज बाथम, अवधेश बाथम, हरीदास बाथम, प्रमोद बाथम आदि सहित सैंकड़ों की संख्या में लोग उपस्थित रहे।