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एक तो खाद का टोटा, उस पर नियमों का डंडा

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-श्यामकिशोर गुर्जर - फोटो : ORAI
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कोंच। सरकार की नीतियों और अफसरों के मौखिक फरमानों से न केवल किसान हलकान परेशान हैं बल्कि सहकारी समितियां भी खासी परेशान हैं। अव्वल तो सहकारी समितियों पर खाद उपलब्ध ही नहीं है और जो हैै भी उसके लिए अफसरों ने इतनेे नियम कानून बना रखे हैं कि समितियों के कर्मचारियों का पूरा दिन किसानों से लड़ते झगड़ते ही गुजर जाता है। अधिकारियों के निर्देशों के मुताबिक एक हेक्टेयर पर सिर्फ दो बोरी यूरिया और एक बोरी डीएपी देने के आदेश हैं। किसानों का कहना है कि नियमानुसार मिलने वाली खाद उनके लिए नाकाफी है। जिससे बार-बार कर्मियों से विवाद की स्थिति पैदा होती है।
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कोंच में सहकारी क्रय विक्रय समिति और एलएसएस जुझारपुरा के अलावा एक और अद्र्घसरकारी संस्था उर्वरक बेचने का काम कर रहे हैं। इन तीनों मेें दो संस्थाओं क्रय विक्रय और जुझारपुरा समिति के पास डीएपी की एक भी बोरी नहीं है, केवल यूरिया की थोड़ी बहुत बोरियां एलएसएस जुझारपुरा में ही बचीं हैं। वे भी एक दो दिन में ही खत्म होने की स्थिति में हैं। मंडी गेट के बगल में स्थित अर्द्ध सरकारी संस्था कृषक भारतीय सेवा केंद्र के पास 65 बोरी डीएपी और 858 बोरी यूरिया है। केंद्र संचालक हरीकिसुन ने बताया कि एक आधार कार्ड पर एक किसान को दस बोरियां उपलब्ध कराई जा रहीं हैं, फिर चाहे किसान के पास कितनी ही बड़ी जोत क्यों न हो। इधर, मंडी समिति परिसर में स्थित पीसीएफ केंद्र पर सिर्फ 300 बोरी यूरिया है, डीएपी समाप्त हो गई है। केंद्र प्रभारी अवधलाल कुशवाहा ने बताया है कि डीएपी के लिए चेक लगाया जा चुका है, जब आ जाएगी तो किसानों के लिए उपलब्ध होगी। एलएसएस जुझारपुरा के खाद प्रभारी महेंद्र कुमार झा ने बताया कि चार गाड़ी यूरिया और एक गाड़ी डीएपी के लिए डिमांड लगाई गई है। अधिकारियों का कहना है कि एक हेक्टेयर पर एक बोरी डीएपी और दो बोरी यूरिया देनी है। जब उनसे अधिकारियों का आदेश दिखाने के लिए कहा गया तो वे बगलें झांकने लगे और बताया कि मौखिक आदेश हैं। सहकारी क्रय विक्रय समिति के रामराजा निरंजन का कहना है कि केंद्र में किसी भी प्रकार की खाद उपलब्ध नहीं है जिसके कारण किसानों को खाद उपलब्ध नहीं कराई जा पा रही है, डिमांड भेजी गई है। ऐसी स्थिति में किसानों को प्राइवेट खाद विक्रेताओं के आसरे अपनी खेती बाड़ी करनी पड़ रही है।
नियमों के बाद भी खाद उपलब्ध नहीं
कोंच। ग्राम जुझारपुरा के निवासी किसान श्यामकिशोर गुर्जर खाद की अनुपलब्धता को लेकर खासे नाराज हैं, कहना है कि किसान कागजी खानापूरी करने में ही परेशान हो रहा है और ऊपर से खाद भी समितियों पर उपलब्ध नहीं है। जिससे खेती बाड़ी में दिक्कत आ रही है।
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एक हेक्टेयर में तीन बोरी खाद ऊंट के मुंह में जीरा
कोंच। ग्राम पचीपुरा निवासी किसान राहुल का कहना है कि एक बोरी डीएपी और दो बोरी यूरिया एक हेक्टेेयर के लिए नाकाफी है। इतनी खाद के लिए मशक्कत करनी पड़ रही है, जो कि डेढ़ दो बीघे सेे ज्यादा में नहीं लगाई जा सकती, बाकी का खाद का इंतजाम कैसे होगा।
बाजारों में बिक रही 60 से 70 रुपये महंगी
एक ओर समितियों में यूरिया और खाद के लिए मारामारी मची है। कर्मचारी नियमों की दुहाई दे रहे हैं तो वहीं प्राइवेट दुकानों पर कोंच, कालपी, जालौन और उरई हर जगह खुलेआम 60 से 70 रुपये महंगे दामों पर खाद बेची जा रही है। अधिकारी भी निरीक्षण नहीं कर रहे हैं।

राहुल- फोटो : ORAI

-प्रइवेट दुकानों से उर्वरक खरीद कर ले जाते किसान- फोटो : ORAI

-एलएसएस जुझारपुरा- फोटो : ORAI

सहकारी क्रय विक्रय समिति- फोटो : ORAI

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