उरई (जालौन)। नोटबंदी के बाद बैंकों, एटीएम व डाकघरों में बढ़ी लोगों की भीड़ को निराशा हाथ लग रही है। कहीं कैश नहीं हैं तो कहीं सर्वर खराब हो गया। कहीं बैंकों के नियमों का हवाला देकर ग्राहकों को टरकाया जा रहा है। इस गड़बड़ी से जरूरतमंद लोगों को परेशानी है। गुरुवार को प्रधान डाकघर में सर्वर न आने से डाकघर से जुडे़ ग्राहकों का कोई काम नहीं हो सका और कर्मचारी दिन भर फुर्सत मेें बैठे टाइम काटते रहे।
नौ नवंबर से बैंकों, डाकघरोें में नोट बंदी के बाद से अभी तक पैसा पाने केे लिए भीड़ उमड़ रही है। महिलाएं, युवा, बुजुर्ग, छात्र, छात्राओं समेत दुकानदार, व्यापारी, किसान, मजदूर, सभी बैंकों व डाकघरों की शाखाओं में सुबह से शाम तक लंबी लाइनों में लगकर पैसा पाने को परेशान है। वहीं, कहीं बैंकों में कैश नहीं है तो कहीं सर्वर नहीं आ रहे हैं। कहीं बैंकों के नियम कायदे आडे़ आ रहे हैं। लोगों के खाते से पैसा निकालने व जमा करने समेत अन्य कामों के लिए भीड़ की वजह से परेशानी उठानी पड़ रही है।
गुरुवार को प्रधान डाकघर उरई में सर्वर न आने से पूरे दिन कोई काम नहीं हो सका। दूरदराज गांवों से आए बुजुर्गों, महिलाओं, युवाओं को काफी समय बर्बाद करने के बाद भी मायूस होकर लौटना पड़ा। अब ऐसे में सवाल यह है कि लोग कैसे अपनी जरूरतों को पूरा करें जबकि बैंकों, डाकघरों के कर्मचारी इस समय किसी की समस्या को हल हीं कर पा रहे हैं। शहर में अधिकतर बैकों केे एटीएम भी बंद पडे़ हैं। इससबैंकों में भीड़ बढ़ रही है। स्टेट बैंक मुख्य शाखा में भी ग्राहकों की भीड़ रही। हजार व पांच सौ के नोट चलन से बंद होने केे चलते परेशानी उठानी पड़ी। केंद्र सरकार द्वारा 24 नवंबर के बाद से बैंकों में पैसे के एक्सचेंज पर प्रतिबंध लगाने के बाद आम लोगाें में अफरातफरी देखी गई। कई बैंकों में लोग अपने नोट बदलवाने के लिए बड़ी संख्या मेें लाइन में खड़े दिखाई दिए। बैंक अधिकरियों ने बताया कि अब नोट बदले नहीं जा सकेंगे। केवल इन्हें बैंकों में जमा किया जा सकेगा।