संवाद न्यूज एजेंसी
हरदोई। अब तक संचालित होती रही महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना में चहेतों को लाभ देने का मामला सामने आया है। व्यक्तिगत लाभार्थी परक योजना के तहत टड़ियावां विकास खंड के साखिन गांव में ऐसे लोगों को कैटेल शेड मंजूर कर दिए गए जिनके पास मवेशी ही नहीं हैं।
मनरेगा के तहत व्यक्तिगत लाभार्थीपरक योजना संचालित होती है। इसके तहत कैटल शेड यानी पशुबाड़ा बनवाए जाने के लिए मनरेगा से बजट दिया जाता है। इस योजना का लाभ उन्हीं जॉब कार्ड धारकों को मिलता है, जिनके पास मवेशी होते हैं। योजना के तहत एक वित्तीय वर्ष में एक जॉब कार्ड धारक को दो लाख रुपये तक मंजूर किए जाने का प्रावधान है। टड़ियावां विकास खंड के साखिन गांव में इन दिनों तीन कैटल शेड बन रहे हैं। यह कैटलशेड विजेंद्र सिंह, रमेश सिंह और भूरे सिंह के नाम से जारी हुए हैं। गांव से जुड़े विश्वस्त सूत्र बताते हैं कि तीनों ही लोगों के पास एक भी मवेशी नहीं है। ऐसे में कैटलशेड का निर्माण कराए जाने की अनुमति देने के पीछे भी अलग अलग चर्चाएं हो रही हैं। दरअसल कैटलशेड मंजूर किए जाते समय लाभार्थी के पास मवेशी होने की पुष्टि संंबंधित क्षेत्र के पशु चिकित्साधिकारी से कराई जाती है।
सूत्र बताते हैं कि साखिन के मामले में पशु चिकित्साधिकारी से भी कोई आख्या नहीं ली गई। पूरे मामले को लेकर एक गोपनीय शिकायत भी हुई है। इसमें कैटेल शेड के लाभार्थियों की पात्रता जांचे जाने की मांग की गई है।