जिला अस्पताल का निरीक्षण करते निदेशक।
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एनएचएम निदेशक पंकज कुमार सबसे पहले महिला अस्पताल पहुंचे। यहां लेबर रूम के बाहर पूछा कि प्रसव के कितने दिन बाद छुट्टी होती है। जननी सुरक्षा योजना का पैसा प्रसूताओं को मिला या नहीं। इस पर किसी ने कोई जवाब नहीं दिया। रजिस्टर मंगाने पर पता चला कि जिन प्रसूताओं की जननी सुरक्षा का पैसा मिल चुका है। केवल उनके ही नाम रजिस्टर में दर्ज है। अन्य प्रसूताओं के नाम दर्ज ही नहीं हैं। जननी सुरक्षा योजना के प्रपत्र व भर्ती मरीजों की संख्या का मिलान न होने पर नाराजगी जताई। कहा प्रतिदिन प्रसव होने वाली प्रसूता का जननी सुरक्षा प्रपत्र भरा जाना चाहिए।
बाहर निकलते ही एक तीमारदार ने शिकायत की कि वह गुलौली से आया है। उसकी पत्नी नूरआलिया को भर्ती नहीं किया जा रहा है। इस पर वह सीएमएस व ड्यूटी पर तैनात डॉक्टर पर भड़क गए। मरीज को तत्काल भर्ती करने के निर्देश दिए। साथ ही एसडीएम अक्षय त्रिपाठी को पूरे मामले की जांच करने के निर्देश दिए। पुरुष अस्पताल कीं इमरजेंसी में तीमारदारों ने बताया कि बाहर की दवाएं व जांचे लिखी जाती है। इमरजेंसी में तैनात डॉ. राहुल सचान की एक तीमारदार ने शिकायत कर दी कि डॉक्टर साहब ने बाहर की जांच लिखी है।
इस पर प्रमुख सचिव ने सीएमएस एके सक्सेना व डॉ. राहुल सचान को फटकारा। निदेशक ने पोषण पुनर्वास केंद्र व वार्डों का भी निरीक्षण किया। इस दौरान सीएमओ अल्पना बरतारिया, एसीएमओ बीएम खेर, डॉ. प्रेम प्रताप, महिला अस्पताल की सीएमएस सुनीता बनौधा, डॉ. केके गुप्ता, डॉ. संजीव गुप्ता, डॉ. मुकुल मिश्रा आदि उपस्थित रहे।