उरई रेलवे स्टेशन का निरीक्षण करने आए झांसी मंडल के डीआरएम ने शनिवार को प्लेटफार्म नंबर एक पर टाइल्स लगाने पर नाराजगी जताई। कहा कि इस तरह का काम कराकर पैसा नदी में नहीं नाले में बहाया जा रहा है। उन्होंने स्टेशन के अधिकारियों व कर्मचारियों से पूछा कि किसकी परमीशन से यह काम यहां कराया जा रहा है। डीआरएम के तेवर देख
सभी अधिकारी कर्मचारी सफाई देने लगे। वहीं नाराज डीआरएम ने टाइल्स बिछाने के काम को तुरंत बंद कराने के आदेश दे दिए। साथ ही चेतावनी दी कि यदि ऐसा काम दोबारा पाया गया तो कार्रवाई की जाएगी। स्पेशल ट्रेन से जैसे ही डीआरएम एके मिश्र 1.20 बजे प्लेटफार्म नंबर एक पर उतरे, प्लेटफार्म ऊंचा नीचा व यहां लगाई गई टाइल्स को देखकर
भड़क उठे। पूछा, यह क्या है, किसने लगवाई हैं यह टाइल्स। इस सवाल पर इंजीनियरिंग विभाग के मंडलीय अभियंता मनोज मिश्र, सहायक मंडलीय अभियंता विश्वनाथन व इंचार्ज आईओडब्लू ए.के शर्मा व आईओडब्लू एके गुप्त सकते में आ गए। अधिकारी बोले, साहब विकलांगों के देखते हुए यह लगवाई गई हैं। इस पर डीआरएम ने पूछा, क्या इससे विकलांगों को
लाभ होगा। इस पर अधिकारी चुप्पी साध गए। बोले, यह तो पूरी तरह पैसे की बर्बादी है। यहां सरकारी पैसा नदी में नहीं, नाले में बहाया जा रहा है। पूछा कि किसकी परमीशन से यह काम कराया जा रहा है। इस पर भी स्टेशन के अधिकारी मौन रहे। इस पर डीआरएम ने कहा कि इस तरह का कार्य मंडल में जिस भी स्टेशन पर हो रहा है उसे तत्काल बंद कराया
जाए। उन्होंने पार्सल आफिस, स्टेशन मास्टर व फुट ओवरब्रिज का भी निरीक्षण किया। उनके साथ सीनियर डीसीएम दुर्गेश दुबे, सीनियर डीओएम श्रीकृष्ण शुक्ला, कमांडेंट आशीष मिश्रा, सीनियर डीएसओ टीपी सिंह, डीएसटी सौरभ श्रीवास्तव, एएसटी जीआर गौर के अलावा कई विभागों के अधिकारी व अधिकारी भी मौजूद थे। इसके पहले पारीछा व एट
स्टेशन का निरीक्षण किया। चिरगांव, रेलवे गेट नंबर 169 व रेलवे किलोमीटर 1187 को भी देखा। वे करीब 40 मिनट उरई स्टेशन पर रहे। इसके बाद वे कालपी-भीमसेन की ओर रवाना हो गए।
अन्य निर्माणों पर भी भड़के
स्टेशन के एक छोर पर बने शौचालय की स्थिति को देखकर डीआरएम फिर भड़क गए। बोले, इस जगह शौचालय बनाने का क्या औचित्य। कोई आता है यहां पर। यह असुरक्षित भी है। इसे दुरुस्त कराएं। उन्होंने वहां रोशनी व सफाई की पर्याप्त व्यवस्था करने के निर्देश दिए। इसके बाद वे आरपीएफ की बैरक में महिला शौचालय देखने पहुंचे। यहां भी उन्होंने इसकी
उपयोगिता पर सवाल उठाया। उन्होंने महिला शौचालय को दूसरी जगह बनाने और बैरक को सही कराने के निर्देश दिए। स्टेशन के बाहर सरकुलेटिंग एरिया में बने फव्वारे के भी ठीक ढंग से संचालित न होने पर नाराजगी जताई। उन्होंने स्टेशन के बाहर वाहन स्टैंड के बारे में भी जानकारी ली।
बंद रखिए वेटिंग रूम
वेटिंग रूम को देखकर कहा कि यह फर्स्ट क्लास वेटिंग रूम है। यदि यात्री नहीं आते तो इसे बंद रखिए। इस पर सीनियर डीसीएम ने समझाया कि यहां एक ही वेटिंग रूम है। इसे बंद रखने में परेशानी हो सकती है। इस पर डीआरएम ने सहमति जताई।
बैरक की जगह मालखाना देख भड़के कमांडेंट
आरपीएफ थाना परिसर में बैरक की जगह मालखाना देखकर वरिष्ठ मंडल सुरक्षा आयुक्त (कमांडेंट) आशीष मिश्र भड़क गए। बोले, यह क्या है। मैंने बैरक के लिए कहा था। आपने यह क्या बना दिया। जब इंजीनियरिंग विभाग के अधिकारियों ने सफाई देनी चाही कि यह मालखाना है। इस पर कमांडेंट ने कहा कि जब मैंने बैरक के लिए बोला था तो फिर मालखाना क्यों बना दिया। यह तो विश्वासघात है। अब मैं इस मामले में व्यक्तिगत हस्तक्षेप करूंगा।
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