उरई। लॉकडाउन झेल रहे रहे मजदूरों की मुसीबतें कम होने का नाम नहीं ले रही है। एक ओर जहां प्रदेश सरकार प्रवासी मजदूरों को उनके घरों तक पहुंचाने के लिए ट्रेनें और बसें चलाने का दावा कर रही है वहीं अभी भी अपनी रोजी रोटी गंवा चुके हजारों मजदूर घर पहुंचने के लिए जिंदगी को जोखिम में डाल रहे हैं। कोई ट्रक, डीसीएम और कोई आटो से ही गुजरात, महाराष्ट्र से यूपी की दूरी तय कर रहा है।
गुरुवार की देर रात एट हाईवे पर हादसे का शिकार हुई डीसीएम के मजदूर भी कुछ ऐसी ही बेबसी से गुजरे, जिसके बाद वे भूख प्यास यहां तक कि जिंदगी की भी परवाह न करते हुए चार दिन पहले मुंबई से डीसीएम में सवार हुए थे। मेडिकल कालेज में भर्ती घायल मजदूरों ने बताया कि अधिकांश मजदूर व उनके परिवार मुंबई के औद्योगिक क्षेत्रों से चार दिन पहले डीसीएम में अपने घरों को जाने के लिए सवार हुए थे। किसी ने दो हजार तो किसी ने तीन हजार रुपये प्रति मजदूर किराया भी दिया।
घायल मजदूर रामसजीवन, शिवशंकर ने बताया कि करीब चालीस दिन से कोई रोटी रोजगार नहीं था, मरते क्या न करते, सो तय किया कि अब बहुत हो चुका और मुंबई छोड़ने का फैसला किया। रास्ते में कहीं कुछ मिलता तो खा लेते वर्ना पानी पीकर ही सफर तय कर रहे थे। मजदूर राजू शेख, बृजेश ने बताया कि डीसीएम में 46 से 50 लोग सवार थे, लेटना तो दूर ठीक से बैठना भी दूभर था, सारी तकलीफें सिर्फ यही सोचकर झेल रहे थे कि कैसे न कैसे एक बार अपने घर और गांव पहुंच जाएं। डीसीएम चालक जौनपुर निवासी राजबहादुर ने बताया कि वह नहीं देख पाया कि उसकी गाड़ी में किस वाहन ने टक्कर मारी है। ड्राइविंग सीट की ओर ही पीछे से इतनी जोर की टक्कर लगी कि वह स्टेयरिंग से अपना नियंत्रण खो बैठा और देखते ही देखते गाड़ी खेत में जा घुसी।
सीएम का ट्विट होते ही अफसर दौड़े
शुक्रवार सुबह जैसे ही प्रवासी मजदूरों की डीसीएम के साथ हुए हादसे की जानकारी सीएम तक पहुंची तो उन्होंने ट्वीट कर शोक जताया और आश्रितों की मदद का एलान किया तो वैसे ही अधिकारियों का लाव लश्कर भी घायलों को देखने के लिए मेडिकल कालेज रवाना हो गया। डीएम और एसपी ने तकरीबन हर एक घायल से बात उन्हें ढांढस बंधाया।
टोल से पता करेंगे हादसे वाली गाड़ी
पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हादसे के अंजाम देने वाला डंपर हो या कोई अन्य वाहन, उसका पता किया जाएगा। इसके लिए घटना के वक्त का समय लेकर एट और आटा के टोल पर लगे सीसीटीवी कैमरों की मदद उस गाड़ी का पता किया जाएगा। इसके लिए दोनों ही थाना पुलिस को निर्देश भी दिए गए हैं।
रिसोर्ट को बनाया क्वारंटीन सेंटर
प्रशासन के अधिकारियों ने बताया कि घायल मजदूरों के लिए मेडिकल कालेज के पास ही स्थित एक रिसोर्ट में क्वारंटीन सेंटर भी बनाया जा रहा है। जैसे-जैसे उनकी हालत में सुधार होता जाएगा, उनका स्वास्थ्य परीक्षण कर उन्हें उक्त रिसोर्ट में क्वारंटीन किया जाएगा। जहां पर उनके खान पान व स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखा जाएगा।
बच्चों को दरोगा ने खाना खिलाया
जिस वक्त घायल मजदूर मेडिकल कालेज में कराह रहे थे, उस वक्त कुछ मजदूर और बच्चों जिन्हें बिल्कुल भी चोट नहीं लगी थी उन्हें रिसोर्ट में बने क्वारंटीन सेंटर में पहुंचा दिया गया था। जहां पर तीन चार बच्चे जिनके परिजन घायल होकर इलाज के लिए बेड पर पड़े थे, उन्हें रोते बिलखते देख दरोगा मो. आरिफ ने उन्हें अपने हाथों से खाना भी खिलाया।
समय पर न पहुंचती एंबुलेंस तो जातीं और जानें
उरई। हादसे की सूचना मिलते ही एंबुलेंस सेवा के मंडल प्रभारी दिनेश सिंह के निर्देश पर आठ से दस एंबुलेंस घटनास्थल पर पहुंच गई। जिला प्रोग्राम मैनेजर सुनील कुमार, दीपक कुमार, विपिन आदि ने आनन फानन में घायलों को अस्पताल भिजवाना शुरू किया। प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि यदि एंबुलेंस समय से न पहुंचती तो और भी जानें जा सकती थीं।