एमडीएम योजना के तहत सप्ताह में परिषदीय विद्यालयों में कोफ्ता और दूध
वितरण का काम अधिकारियों की लापरवाही के चलते फिर से खटाई में पड़ता जा रहा
है। अभिभावक और छात्र लगातार इसकी शिकायत उच्चाधिकारियों और शिक्षा विभाग
के संबंधित अधिकारियों से करते रहे हैं, लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। ये
खुलासा माधौगढ़ क्षेत्र में आयोजित चौपाल में तब हुआ जब
कुछ स्कूलों के
बच्चों ने उप निदेशक मंडी के सामने अपनी व्यथा कही। बच्चोें ने कहा कि
उन्हें सप्ताह में एक दिन तय शेड्यूल के तहत न तो दूध दिया जा रहा है और न
ही कोफ्ता। कुछ जगह पानी मिलाकर दूध बांटा जाता है। कई बार इसकी शिकायत
विभागीय अधिकारियों से की जा चुकी है। मालूम हो कि बच्चों को पौष्टिक आहार
देने के लिए ही शासन
की ओर से प्रदेश भर के परिषदीय स्कूल में हफ्ते में
एक दिन दूध वितरण योजना चल रही है। शुरुआत में तो योजना ठीक चली, लेकिन
इसके बाद शिक्षकों ने दूध के लिए पर्याप्त बजट न दिए जाने को लेकर हो हल्ला
भी किया। अब दूध वितरण में जमकर घालमेल किया जा रहा है। सूत्रों की मानें
तो स्कूलों में दूध वितरण तो होता है, लेकिन इसमें पानी ज्यादा होता
है।
इससे एक तो शासन की मंशा पूर्ण नहीं हो रही है वहीं, बच्चों को पौष्टिक
आहार भी नहीं मिल पा रहा है। गत दिनों माधौगढ़ के अटागांव में लगाई गई
चौपाल में स्कूली बच्चों ने उप निदेशक कृषि मंडी के सामने इसका खुलासा किया
था और कहा कि स्कूल में दूध वितरण में शिक्षक मनमानी कर रहे हैं।
अब
मामला तो अफसरोे के संज्ञान में आ चुका है, लेकिन अब क्या कार्रवाई की जाती
है, ये देखने वाली बात है। बताते चलें कि इसकेे पहले भी इस तरह के मामले
प्रकाश में आ चुके हैं, लेकिन अफसरों का ध्यान न जाने की वजह से लापरवाही
जारी है। अटागांव के ग्रामीण अमर सिंह, प्रबल प्रताप सिंह, राजवीर सिंह,
रणधीर सिंह का कहना है कि इस मामले की जांच कराकर दोषियों पर कार्रवाई होनी
चाहिए।
वर्जन
मामले को दिखवाया जाएगा। एमडीएम योजना के तहत
बच्चों को हर हाल में दूध की व्यवस्था की
जाएगी। राजेश कुमार, बीएसए