महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) में काम
करने वाले मजदूरों पर बजट की मार पड़ रही है। हालात यह हैं कि जाब कार्ड
धारक मजदूरों की दो करोड़ से अधिक की बकायेदारी विभाग पर हो गई है। जनपद का
कोई भी ऐसा ब्लाक नहीं है जहां पर मजदूरों का शत प्रतिशत भुगतान हुआ हो।
ऐसे में मजदूरों के सामने आर्थिक संकट आ गया है।
गौरतलब हो कि मनरेगा के
तहत जॉब कार्ड धारकों को गांव में ही रोजगार मुहैया कराने के लिए केंद्र
सरकार की ओर से व्यवस्था की गई है। इसके तहत जॉब कार्ड धारकों को गांव में
ही काम और दाम दिलाया जाता है। इधर मजदूरों को गांव में काम तो मिला लेकिन
कई दिन से मजदूरी नहीं मिलने से समस्या हो गई है। सर्दी से बचाव के लिए
गर्म कपड़ों की
खरीददारी भी नहीं कर पा रहे हैं। कुछ तो ऐसे हैं जो कई
दिनों से मजदूरी की धनराशि की आस लगाए बैठे हैं। जब रकम उनके खाते में आए
तब वह जरूरी कामों को पूरा कर सकें। बजट की कमी नजर आने से मनरेगा के काम
के लिए भी
मजदूर नहीं मिल रहे हैं। उन्हें लग रहा है कि बजट जाने कब आएगा
और उनका पैसा अटक गया तो उनके आगे तो पेट भरने की समस्या खड़ी हो जाएगी।
जनपद के सभी नौ विकास खंड क्षेत्रों के जॉब कार्ड धारक मजदूरों की मजदूरी
का दो करोड़ 11 लाख 32 हजार रुपये बकाया पड़ा हुआ है। विभागीय अधिकारियों
ने बजट की डिमांड केंद्र सरकार से की है।
महेवा ब्लाक की सबसे अधिक बकायेदारी
जनपद
में मनरेगा मजदूरों की बकायेदारी तो हर एक ब्लाक में है लेकिन महेवा
क्षेत्र के मजदूरों की सबसे अधिक मजदूरी बाकी है। यहां 80.80 लाख रुपये के
बजट की जरूरत है। ये रकम मिले तब काम करने वाले सभी मनरेगा मजदूरों को दाम
मिल पाएगा। दूसरी ओर जालौन ब्लाक में सबसे कम 6.28 लाख रुपये बकाया है।
47 करोड़ का हो चुका भुगतान
मनरेगा
मजदूरों के लिए केंद्र सरकार से बजट मिलने के बाद काम के अवसर दिए गए।
पूरे जनपद में 4752.84 लाख की धनराशि जॉब कार्ड धारक मजदूरों को काम के एवज
में बांटी जा चुकी है। इस बजट से ग्रामीण क्षेत्र में काम कराया गया और
इसके बाद भुगतान किया गया।
ब्लाकवार मजदूरी की विभाग पर बकायेदारी
ब्लाक धनराशि
माधौगढ़ 14.51 लाख
रामपुरा 15.82 लाख
कोंच 19.60 लाख
नदीगांव 19.60 लाख
जालौन 06.28 लाख
कुठौंद 14.80 लाख
महेवा 80.82 लाख
डकोर 27.86 लाख
कदौरा 21.86 लाख
वर्जन
मनरेगा
में काम करने वाले जॉब कार्ड धारक मजदूरों को काम के बदले दाम नहीं मिल
पाया है। तकरीबन दो करोड़ रुपये मजदूरी बाकी हो गई है। केंद्र सरकार को
डिमांड भेजी गई है। जल्द ही बजट अवमुक्त होने की संभावना है। इसके बाद
मजदूरों के खाते में धनराशि पहुंच जाएगी। मनरेगा में काम दिया जा रहा
है।-प्रमोद सिंह चंद्रोल, उपायुक्त मनरेगा