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Jalaun News: मनरेगा... फर्जी नाम पर भुगतान, हिंदू परिवारों के जॉबकॉर्ड पर मुस्लिम नाम

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रामपुरा। विकास खंड रामपुरा की ग्राम पंचायत हुसेपुरा सुरई में महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत जॉब कार्डों में बड़े पैमाने पर फर्जीवाड़ा सामने आया है। लोकपाल मनरेगा गंगा सिंह की जांच में सामने आया कि 24 से अधिक हिंदू परिवारों के जॉब कार्डाें पर फर्जी रूप से मुस्लिमों के नाम दर्ज कर लाखों रुपये के भुगतान किया गया। इस गंभीर मामले में संबंधित रोजगार सेवक के खिलाफ 9,02,424.39 रुपये की वसूली की संस्तुति की गई है।
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ब्लॉक के हुसेपुरा के मजरा रमानीपुर निवासी शिकायतकर्ता शिवनारायण सिंह ने प्रशासन से शिकायत की थी कि मनरेगा के रोजगार सेवक अंकित दीक्षित ने उनके जॉब कार्डों में अन्य व्यक्तियों के नाम जोड़कर फर्जी भुगतान कराया है। शिकायतकर्ता ने यह भी बताया कि दर्जनों की संख्या में ऐसे जॉब कार्ड हैं, जिनमें वर्षों से भुगतान हो रहा है, जबकि उनका परिवार से कोई संबंध नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनकी अनुमति के बिना उनके जॉब कार्ड में राजनारायण और अर्चना जैसे व्यक्तियों के नाम जोड़ दिए गए। इसके अतिरिक्त, जिन कार्यों के लिए भुगतान दिखाया गया है, वे वास्तव में हुए ही नहीं हैं। यह भी खुलासा हुआ कि शिकायतकर्ता को उनका मूल जॉब कार्ड अब तक नहीं लौटाया गया है।
इस शिकायत के बाद लोकपाल मनरेगा गंगा सिंह ने मामले की जांच शुरू की। जांच के दौरान, ग्राम प्रधान गीता देवी ने लोकपाल को बताया कि जॉब कार्डों का रखरखाव, सत्यापन, मोबाइल ऐप फीडिंग और ई-केवाईसी जैसे सभी तकनीकी कार्य रोजगार सेवक द्वारा ही किए जाते हैं। जांच के समय रोजगार सेवक, पंचायत सचिव और तकनीकी सहायक उपस्थित नहीं हुए, जबकि शिकायतकर्ता ने अपने पक्ष में आवश्यक दस्तावेज प्रस्तुत किए। इसके बाद लोकपाल जीएस सेंगर ने गहन जांच की और पाया कि शिकायतकर्ता द्वारा लगाए गए आरोप पूरी तरह से सत्य हैं। जांच में पाया गया कि रोजगार सेवक ने वर्षों पहले जॉब कार्ड बनवाकर अपने पास रख लिए थे। इसके बाद रोजगार सेवक ने अपनी मर्जी से हिंदू परिवारों के जॉब कार्डों में मुस्लिम लोगों के नाम जोड़ दिए और उनके नाम पर लगातार भुगतान प्राप्त करता रहा। जांच के दौरान 24 से ज्यादा जॉब कार्ड ऐसे मिले हैं जो पूरी तरह से संदिग्ध हैं। जांच के निष्कर्षों के आधार पर लोकपाल ने रोजगार सेवक के विरुद्ध 9,02,424.39 रुपये की वसूली की सिफारिश जारी की है।
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इनसेट

जांच के लिए टीम का गठन
इन संदिग्ध जॉब कार्डों की गहनता से जांच के लिए एक विशेष टीम का गठन किया गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि मनरेगा के अन्य कार्यों की भी इसी तरह से जांच की जाए तो इस फर्जीवाड़े के और भी कई मामले सामने आ सकते हैं, जिससे सरकारी धन के दुरुपयोग का एक बड़ा नेटवर्क उजागर हो सकता है। इस मामले से मनरेगा योजना के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और जवाबदेही पर गंभीर प्रश्न खड़े हो गए हैं।
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भविष्य की कार्रवाई और जन-जागरूकता

इस मामले में ग्राम प्रधान ने यह स्पष्टीकरण दिया है कि तकनीकी कार्यों की जिम्मेदारी रोजगार सेवक की है। यह स्थिति रोजगार सेवकों की मनमानी को बढ़ावा देने वाली साबित हो रही है। इस प्रकार के फर्जीवाड़े से न केवल सरकारी खजाने को भारी नुकसान होता है, बल्कि यह उन जरूरतमंदों के अधिकारों का भी हनन है जिन्हें वास्तव में मनरेगा के तहत काम मिलना चाहिए। प्रशासन अब इन 24 संदिग्ध जॉब कार्डों की जांच पर ध्यान केंद्रित कर रहा है, और उम्मीद है कि इससे और भी अनियमितताएं सामने आएंगी। ग्रामीणों की मांग है कि इस तरह के मामलों में कड़ी कार्रवाई हो ताकि भविष्य में ऐसी घटनाएं दोबारा न हों। इस प्रकरण से यह भी स्पष्ट होता है कि योजनाओं के कार्यान्वयन में स्थानीय स्तर पर कड़ी निगरानी और औचक निरीक्षण की आवश्यकता है।
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शिकायत पर जांच की गई थी, जांच में पाया गया कि रोजगार सेवक ने बिना अनुमति के जॉब कार्डों में धारकों के नाम को जोड़ दिया था। वसूली की संस्तुति की गई है।
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- गंगा सिंह सेंगर, लोकपाल, मनरेगा
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