उरई। जिला महिला अस्पताल में नवजात के बेहतर स्वास्थ्य के लिए मिल्क बैंक बनाया गया है। यहां स्टाफ की भी तैनाती कर दी गई है। केवल उद्घाटन का इंतजार है। वहीं, जिम्मेदार कह रहे हैं कि ट्रायल शुरू करा दिया है। जल्द उद्घाटन किया जाएगा।
महिला अस्पताल में हर माह 15 से 20 बच्चे जन्म लेते हैं, जिनका वजन कम, पीलिया, सांस लेने में परेशानी या दिक्कत होती है। ऐसे बच्चों को एसएनसीयू में भर्ती कराकर इलाज किया जाता है लेकिन कई बार नवजात की मां बच्चे को दूध नहीं पिला पाती है। ऐसे बच्चों की परेशानी को देखते हुए स्वास्थ्य विभाग ने एसएनसीयू यूनिट के बगल में मिल्क बैंक या स्तनपान प्रबंधन इकाई की स्थापना की गई है।
यहां पर मां का दूध स्टोर करके रखा जाएगा और एसएनसीयू में भर्ती बच्चे को स्टाफ दूध पिलाएगा। जिला महिला अस्पातल के मुख्य चिकित्सा अधीक्षक डॉ. एनआर वर्मा का कहना है कि एसएनसीयू के बगल में मिल्क बैंक है। मशीनें भी आ गईं हैं। यहां काउंसलर के रूप में आशा राठौर की तैनाती कर दी गई है। जो महिलाओं को स्तनपान के फायदे बताकर जागरूक भी करेंगी। इसका ट्रायल भी शुरू हो गया है। महिलाओं को जल्द मिल्क बैंक का उद्घाटन होगा।
ऐसी महिलाएं नहीं कर सकती है दूध दान
तंबाकू, गुटका का सेवन न करती हों।
हाल में ही रक्त चढ़वाने वाली।
कैंसर निरोधक दवाओं का सेवन करने वाली।
एचआईवी, टीबी, हेपेटाइटिस जैसी बीमारियों वाली।
दूध दान के लिए जरूरी।
यह दूध सिर्फ अस्पताल में एसएनसीयू में भर्ती बच्चों को मिलेगा।
दूध दान करने वाली माताओं को किसी तरह का आर्थिक प्रोत्साहन नहीं मिलेगा।
मां अपने बच्चे को स्तनपान करा चुकी हो और लिखित सहमति दें।