उरई। जिले में गर्मी ने तेवर दिखाने शुरू कर दिए हैं। 12 साल का रिकॉर्ड तोड़ते हुए गुरुवार (13 मार्च) को अधिकतम तापमान बढ़कर 37 डिग्री सेल्सियस पर पहुंच गया है। लोगों को दिन में ही कूलर और एसी चलाने लगे हैं। बढ़ते तापमान का असर गेहूं और सरसों की उपज पर पड़ने लगा है।
मौसम विभाग के अनुसार मार्च महीने में जिले का अधिकतम तापमान सामान्य तौर पर करीब 34 डिग्री सेल्सियस के आसपास रहता है। 13 मार्च को अधिकतम तापमान 37 डिग्री दर्ज किया गया है। इससे पहले वर्ष 2014 में मार्च में तापमान 37 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा था।
जिले में करीब ढाई लाख हेक्टेयर क्षेत्रफल में गेहूं की खेती की जाती है। इस समय फसल दाना बनने की अवस्था में है, ऐसे में अचानक बढ़ी गर्मी किसानों की चिंता बढ़ा रही है। मौसम और कृषि वैज्ञानिक विस्टर जोशी का कहना है कि यदि इसी तरह तापमान बढ़ता रहा तो इसका सीधा असर गेहूं की फसल पर पड़ सकता है। अधिक तापमान के कारण गेहूं के पौधे समय से पहले पकने लगते हैं। दाना पतला हो जाता है और उपज में कमी आने की आशंका है।
किसान रामस्वरूप निषाद का कहना है कि अभी गेहूं की फसल दाने बनने की स्थिति में है। अगर तापमान इसी तरह बढ़ता रहा तो दाना पतला रह जाएगा और पैदावार घट सकती है। किसान रमेश पाल ने बताया कि मार्च में इतनी गर्मी पहले कम ही देखने को मिली है। अगर कुछ दिन और इसी तरह तेज धूप रही तो फसल जल्दी पककर सूख जाएगी। इससे उपज पर असर पड़ सकता है। इससे गेहूं ही नहीं सरसों की पैदावार पर असर पड़ेगा।
वर्ष
13 मार्च के आसपास अधिकतम तापमान
न्यूनतम तापमान
2026
लगभग 35- 37 डिग्री सेल्सियस
19- 20डिग्री सेल्सियस
2025
लगभग 33- 34डिग्री सेल्सियस
18- 19डिग्री सेल्सियस
2024
लगभग 32- 34डिग्री सेल्सियस
18- 20डिग्री सेल्सियस
2023
लगभग 31- 33डिग्री सेल्सियस
17- 19डिग्री सेल्सियस
2022
लगभग 33- 35डिग्री सेल्सियस
19- 21डिग्री सेल्सियस
मौसम और कृषि विशेषज्ञ विस्टर जोशी की राय
1- हल्की सिंचाई करें
जब तापमान बहुत अधिक हो जाए तो खेत में हल्की-हल्की सिंचाई करें। इससे मिट्टी में नमी बनी रहती है और पौधों पर गर्मी का असर कम पड़ता है।
2. सुबह या शाम को सिंचाई करें
दोपहर में पानी देने से पानी जल्दी वाष्प बनकर उड़ जाता है। इसलिए सुबह जल्दी या शाम को सिंचाई करना बेहतर माना जाता है।
3. खेत में नमी बनाए रखें
खेत की मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए मल्चिंग (फसल अवशेष या भूसा बिछाना) फायदेमंद होता है। इससे मिट्टी जल्दी सूखती नहीं।
4. पोटाश या सूक्ष्म पोषक तत्व का छिड़काव
विशेषज्ञों के अनुसार 0.5% पोटाश या सूक्ष्म पोषक तत्वों का स्प्रे करने से पौधों की गर्मी सहन करने की क्षमता बढ़ती है।
5. अनावश्यक निराई-गुड़ाई से बचें
अत्यधिक गर्मी में ज्यादा निराई-गुड़ाई करने से मिट्टी की नमी कम हो जाती है, इसलिए इस समय कम से कम छेड़छाड़ करें।
6. फसल की नियमित निगरानी
गर्मी बढ़ने पर कीट व रोग का खतरा भी बढ़ सकता है, इसलिए खेत का नियमित निरीक्षण करते रहें।