कार्यशाला में प्रशिक्षण देते जिला प्रतिरक्षण अधिकारी
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उरई। मीजल्स-रूबेला के केसों की निगरानी के लिए स्वास्थ्य विभाग के सर्विलांस को मजबूत किया जाएगा। किसी भी तरह का खसरा का केस मिलने पर स्वास्थ्य विभाग की टीम तत्काल मौके पर पहुंचकर नमूने लेगी और जांच कराकर इलाज शुरू कर देगी।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्लूएचओ) और स्वास्थ्य विभाग की ओर से कालपी रोड स्थित एक होटल में मीजल्स-रूबेला की रोकथाम को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला हुई। जिला प्रतिरक्षण अधिकारी डा. सत्यप्रकाश ने कहा कि पोलियो की तरह मीजल्स-रूबेला को भी समाप्त करने के लिए पिछले साल नवंबर में देश में एक अभियान चलाया गया था। अगले साल तक मीजल्स-रूबेला को हर हाल में समाप्त करना है।
इसमें मीजल्स के केसों में कमी आई है। अगस्त महीने में जालौन में दो और डकोर ब्लाक में एक केस मिला है। यह सभी बच्चे दो साल से कम उम्र के है। ऐसे केसों को खोजबीन के लिए विभागीय सर्विलांस को मजबूत करना है। उन्होंने बताया कि बुखार या चपटे चकत्ते, नाक बहना, जुकाम, आंख आना जैसे लक्षण मिलने पर चिकित्सकों को सतर्कता बरतने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि एमआर की रोकथाम के लिए सभी सीएचसी व पीएचसी के चिकित्सा अधीक्षकों को नोडल अधिकारी बनाया गया है।
यह सभी अधिकारी प्रत्येक सोमवार को जिला मुख्यालय पर रिपोर्ट भिजवाएंगे। डब्लूएचओ के सब रीजनल टीम लीडर (एसआरटीएल) कानपुर डा. मुनेंद्र शर्मा ने कहा कि सर्विलांस नेटवर्क को मजबूत करें। जिस क्षेत्र में केस मिलता है तो वहां विशेष अभियान चलाए। ऐसे केस मिलने पर उनसे तत्काल संपर्क करने को कहा। इस दौरान सीएमओ डा. अल्पना बरतारिया, सीएमएस महिला अस्पताल डा. सुनीता बनौधा, डब्लूएचओ की एसएमओ डा. भाग्यश्री के अलावा सीएचसी, पीएचसी के प्रभारी व डब्लूएचओ के प्रतिनिधि मौजूद रहे।