कोंच के लौना गांव में इन दिनों महामारी का प्रकोप है। 80 फीसदी आबादी विचित्र बुखार और चिकनगुनिया से परेशान है। हर घर में दो से अधिक लोग खाट पकड़े हैं। सबसे बुरी हालत बूढ़ों व नवजातों की है। वहीं स्वास्थ्य विभाग को इसकी भनक तक नहीं है और न ही अब तक यहां कोई टीम ही भेजी गई है। हसील मुख्यालय से लगते गांव लौना की आबादी 1500 है।
एक माह से यहां के लोगों को विचित्र बुखार ने चपेट में ले रखा है। ऐसा कोई घर नहीं है जहां मरीज न हों। गांव के समाजसेवी और पूर्व प्रधान ब्रजेशकृष्ण शुक्ल का कहना है कि गांव की लगभग दो तिहाई आबादी को इस बीमारी ने जकड़ रखा है, लोगों का पूरा शरीर ऐंठ रहा है। इससे अनुमान है कि बीमारी चिकनगुनिया हो सकती है। गांव का प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र
पिछले सात सालों से बना खड़ा है लेकिन शुरू होने का नंबर ही नहीं आता है। गांव में फैली बीमारी डायग्नोज नहीं हो पाने के कारण गांव में पहुंच रहे झोलाछाप चांदी काट रहे हैं।
भगवानदास (70) व उनकी पत्नी कुंजनदेवी (65) भी बीमार पड़े हैं। इस घर में दस सदस्य हैं जिनमें सात खाट पर हैं। कुछ ऐसा ही हाल उमाशंकर कुशवाहा के घर का है जहां कशिश (9), उजाला (7) व रिक्ता (3) के साथ ही सास बहू भी खटिया पकड़े हैं।
मसगायां और मटरा में भी फैला विचित्र बुखार
ग्रामीण अंचलों में विचित्र बुखार का कहर थमता नजर नहीं आ रहा है। कदौरा ब्लाक के मसगायां व मटरा गांव में यह बीमारी तेजी से फैल रही है, लेकिन स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी इस बात से अनजान हैं। गांव में लक्ष्मण शरण दुबे, सुरेश दुबे, लालता यादव, ज्ञान सिंह, वसीर मंसूरी, रामनारायन अहिरवार समेत एक सैकड़ा लोग विचित्र बुखार की चपेट में हैं।
मसगायां में अवधेश चतुर्वेदी, उदेश, हरचरन चतुर्वेदी, रामसनेही पाल, शिव सिंह आदि लोग बीमारी से परेशान है। इसी तरह बैरई, इमिलिया, धमना, बांध आदि ग्रामों में भी फैला है। कालपी के मोहल्ला टरननगंज इलाहाबाद बैंक निवासी प्रशांत गुप्ता व अन्य लोग भी चिकनगुनिया बीमारी से पीड़ित हैं।