मुहम्मदाबाद। मौसम की वजह से किसानों को हरी मटर ने इस बार धोखा दे दिया है। हालत यह है कि हरी मटर की अगैती खेती करने वाले किसान अपनी लागत भी नहीं निकाल पा रहे हैं। इसकी वजह सिर्फ अधिक तापमान बना है। किसानों का कहना है कि शुरुआती समय में उन्होंने इस वजह से बुआई कर दी थी कि उन्हें अच्छे दाम मिल जाएंगे और वह दूसरी फसल की भी तैयारी शुरू कर देंगे। लेकिन इस बार उनकी लागत भी नहीं निकल रही है। इस वजह से कुछ किसानों ने अपनी फसल की जोताई करवाकर दूसरी फसल की बुआई कर दी है।
जिले में हरी मटर की अगैती बुआई 15 अक्टूबर से शुरू हो जाती है। इसके साथ ही यह फसल 60 से 65 दिनों में तैयार हो जाती है। किसानों ने दूसरी फसल बोने के लिए समय से हरी मटर की बुआई शुरू कर दी थी। लेकिन इस बार शुरुआती समय से ही तापमान कम नहीं हुआ, इससे फसल सूखने लगी थी। कई किसानों ने फसल की जोताई भी कर दी थी तो कई किसानों ने दो बार खेत में वर्षा की थी। लेकिन इसके बाद भी फसल के उत्पादन में बढ़ोतरी नहीं हुई।
किसान राजू राजपूत, नृपत सिंह, रामहेत सिंह आदि ने बताया कि औसत उपज की क्षमता 80-90 क्विंटल प्रति हेक्टेयर होती है। लेकिन, इस बार आधा भी नहीं निकल रहा है। इससे फसल की लागत निकालने में भी पसीना छूट रहा है। किसान इकराम उल्ला, वीरेंद्र, संतोष आदि कहते हैं कि हरी मटर के बाद गेहूं व बेझर की खेती कर लेते थे। इससे दोनों फसलों का लाभ मिल जाता था।
बताया कि पंजाब, कानपुर, आजमगढ़, कन्नौज आदि जिलों से बड़े व्यापारी पहले ही से ही खेतों पर आकर एडवांस पैसा दे देते थे। लेकिन इस बार फसल सही न होने से व्यापारी भी नहीं आया है और जो आसपास जिलों के छोटे व्यापारी भी आ रहे हैं। वहीं गाड़ी भर माल भी नहीं निकल रहा है। इससे मजबूरी में छोटे व्यापारियों को मटर बेेचनी पड़ रही है। किसान बोले, इस बार जब पैदावार सही नहीं हुई है। तब मटर के दाम बाजार में सही मिल रहे हैं लेकिन पैदावार न होने से इसका कोई फायदा नहीं है।
खाद-बीज की लागत भी नहीं निकली
मुहम्मदाबाद गांव निवासी किसान तारिक ने बताया कि तीन बीघा मटर में उन्हें तीस हजार की लागत आई थी। लेकिन जब मटर की तुड़ाई हुई तो सिर्फ 18 हजार की मटर ही निकली। इसमें वह खाद-बीज की लागत भी सही से नहीं निकाल पाए हैं। अब अगली फसल के लिए परेशानी होगी।
रेट सही लेकिन पैदावार घटी
कुसमिलिया गांव निवासी किसान चतुर सिंह ने बताया कि शुरूआत में ही मटर की बुआई कर दी थी कि रेट अच्छा मिलेगा। रेट तो सात हजार रुपये क्विंटल तक मिल रहा है। लेकिन पैदावार न के बराबर हुई है। इससे लागत निकालने व मजदूरों का भुगतान करने में ही समस्या खड़ी होगी।