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पालतू कुत्ते को युवक पर छोड़ अपराध की दुनिया में रखा कदम

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कोंच (जालौन)। कानपुर के जेके कैंसर अस्पताल के शौचालय में फांसी लगाकर जाने देने वाले सजायाफ्ता कैदी बिल्लू ने अपराध की ओर अपना पहला कदम अपने नदीगांव ब्लाक स्थित ग्राम मऊ में ही रखा। गांव के ही एक युवक पर बिल्लू ने अपना पालतू कुत्ता छोड़ दिया था। लहूलुहान युवक के परिजनों की ओर से दर्ज कराई रिपोर्ट ही बिल्लू के हिस्ट्रीशीट की पहली एफआईआर बनी। इसके बाद उसने बीहड़ के डकैतों का साथ किया और फिर दो हत्याओं को अंजाम दिया। यही वह वक्त था कि जब गांव-गांव का एक-एक आदमी उसके नाम से ही थर्राता था। इसी दौरान यानी 2005 में थाना पुलिस ने बिल्लू की हिस्ट्रीशीट भी खोली। इसके बाद तो बिल्लू के परिवार वालों ने भी उसका साथ छोड़ दिया। बिल्लू को 28 मई को फतेहगढ़ सेंट्रल जेल से कैदी को इलाज के लिए अस्पताल लगाया गया था।
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गांव निवासी कालीचरण के चार बेटों में से तीसरे नंबर का बिल्लू शुरुआत से ही अपराधी प्रवृति का था। घर के दरवाजे के सामने से गुजरने वाले ग्रामीणों के साथ अभद्रता, गालीगलौज करना उसका शौक था। ग्रामीणों की मानें तो 1998 में घर के दरवाजे बैठे बिल्लू की गांव के ही एक युवक से कहासुनी हो गई। जिस पर गुस्साए बिल्लू ने अपना पालतू कुत्ता छोड़कर युवक को लहूलुहान करा दिया। जिससे पास पड़ोस में अफरा तफरी मच गई। युवक के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने बिल्लू के खिलाफ पहला मामला दर्ज किया। इसके बाद तो मानो बिल्लू का नामथाने की जीडी में छप सा गया।
तमंचा लेकर घूमना, लोगों के साथ मारपीट करने के कई और मामले दर्ज हुए। 2002-03 के आसपास बिल्लू ने बीहड़ के कुछ डकैतों का भी साथ किया। डकैतों की वारदात में भी बिल्लू का नाम शामिल था। इसी दौरान रंजिश के चलते बिल्लू ने गांव के ही कन्हैया और अवधेश की अलग-अलग समय पर हत्या की। इसके बाद ही 15 मार्च 2005 में पुलिस को बिल्लू की हिस्ट्रीशीट खोलनी पड़ी। बिल्लू की हरकतों से परेशान उसके तीन अन्य भाइयों को भी आखिर में गांव छोड़कर दिल्ली जाना पड़ा।
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