बीहड़ पट्टी में विकास के लाख दावे किए जा रहे हों, लेकिन स्थिति ढाक के पात जैसी है। नतीजा है कि बाशिंदे सालोें बाद भी आज मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं। न तो सिंचाई के संसाधन हैं और न ही पढ़ाई के। यही नहीं, गांव जाने तक का रास्ता तक पक्का नहीं है। वोट लेने के नाम पर चुनाव में हर बार नेता वादे करते हैं, लेकिन किसी ने आज तक
जख्मों पर मरहम नहीं लगाया। वादे पूरे न किए जाने से ग्रामीणों के आक्रोश को भांप नेता इस बार वोट मांगने तक नहीं गए। जब रविवार को प्रतिनिधि ने बीहड़ पट्टी के गांव बिलौड़, सुल्तानपुरा, जखेता, हुकुमपुरा का दौरा किया तो ग्रामीणों का दर्द जुबां पर आ गया। आरोप लगाया कि उपेक्षा का ही नतीजा है कि इस बार सुल्तानपुरा गांव में मतदान प्रतिशत कम रहा। ग्रामीणों का कहना है कि हाकिमों ने भी उनकी आवाज को नहीं सुना। पेश है एक रिपोर्ट।
चार माह कैद रहते हैं खोड़न के बाशिंदे
खोड़न गांव के पास लघु सिंचाई विभाग का चेकडैम बना हैं। निकासी के इंतजाम न होने के चलते यहां पर बरसात में पानी भर जाता है। इससे ग्रामीण चार महीने तक के लिए गांव में कैद रहने को मजबूर रहते हैं। हाकिमों से शिकायत भी की, लेकिन किसी ने इस ओर ध्यान नहीं दिया।
मतदान प्रतिशत पर पड़ा असर
हाकिमों व नेताओं का उपेक्षा का नतीजा यह है कि इस बार सुल्तानपुरा में मतदान का प्रतिशत खासा कम रहा। यहां कुल 450 मतदाता हैं, लेकिन चुनाव में मात्र 120 वोटरों ने ही मतदान किया। बाकी ने उपेक्षा के चलते नेताओं को सबक सिखाने के लिए मतदान नहीं किया।
पलायन को मजबूर हो रहे ग्रामीण
बीहड़ पट्टी में विकास की अलख न जागना भी पलायन की वजह माना जा रहा है। जानकारों की मानें तो बिलौड़ गांव की आबादी 500 है। विकास न होने से रोजगार भी नहीं है। इससे दो सैकड़ा युवा, ग्रामीण व खेती किसानी से जुडे़ लोग दिल्ली, मुंबई, सूरत इत्यादि राज्यों में रोजगार के लिए पलायन कर चुके हैं।
नदी पार कर गांव जाते ग्रामीण
पहुज व सिंध नदी के पार बसे ग्राम सुल्तानपुरा जाने के लिए ग्रामीणों को नाव का सहारा लेना पड़ता है। कई बार नेताओं व जनप्रतिनिधियों से यहां पर पुल बनवाए जाने की मांग की, लेकिन आज तक किसी ने नजरें इनायत नहीं की। इससे मजबूरन ग्रामीणों को नाव से नदिया पार कर गांव जाना पड़ता है।
वादे हुए तमाम, कुछ हाथ नहीं आया
राजेश, रामशंकर, रूप सिंह, अजुद्धी, रामलखन बीहड़ पट्टी में विकास न होने के पीछे जनप्रतिनिधियों और हाकिमों को कारण मानते हैं, जो वादे तो बडे़-बडे़ करते हैं, लेकिन आज तक उन्हें पूरा कराने की जहमत नहीं उठाई। इसी का नतीजा यह है कि ग्रामीण मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं।
बोेले जिम्मेदार
जिले में चुनाव के चलते आचार संहिता लगी है। इस वजह से विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। यदि रामपुरा के बिलौड़, सुल्तानपुरा के ग्रामीण मूलभूत समस्याओं से जूझ रहे हैं तो उनका हर संभव निदान कराया जाएगा। ग्रामीणों को किसी कीमत पर परेशानी नहीं होने दी जाएगी।- सुरेश चंद्र, उप जिलाधिकारी, माधौगढ़