कोरोना काल: रामलीला पर छाए संकट के बादल
कलाकार, दर्शक और पदाधिकारी आयोजन को लेकर असमंजस में
फोटो-5 रामलीला में राम दरबार का दृश्य(फाइल फोटो)।
फोटो-6 रामलीला देखने के लिए उमड़ी दर्शकों की भीड़ (फाइल फोटो)।
संवाद न्यूज एजेंसी
कोंच। गणेश चतुर्थी के बाद अब 168 साल पुरानी ऐतिहासिक रामलीला पर कोरोना का संकट है। लीला को लेकर संशय बना हुआ है। कमेटी पदाधिकारी आयोजन को लेकर परेशान हैं। वहीं कलाकारों के सामने रोजी, रोटी का संकट है। दर्शक मायूस हो रहे हैं।
हर साल इस वक्त तक रामलीला की तैयारियां तेजी पकड़ने लगती थीं। चंदे से लेकर मंच सज्जा और कलाकारों की ड्रेस की साफ-सफाई शुरू हो जाती थी। इस बार कोरोना के चलते आयोजन को लेकर संशय है। लीला में किरदार निभाने वाले कलाकार परेशान हैं। रामलीला से इनके खर्चे चल जाते थे। इस बार ऐसा मुश्किल लग रहा है। पदाधिकारियों का कहना है कि आयोजन को लेकर प्रशासन से संपर्क बना हुआ है।
फोटो-7 रवींद्र शुक्ला
अभी तक कहीं से नहीं मिला बुलावा
करीब 18 साल से रामलीला में अभिनय करने वाले सिमिरिया निवासी रवींद्र शुक्ला ने बताया कि कोंच के अलावा आसपास के जनपदों में हनुमान का अभिनय करने जाते हैं। इस बार अभी तक कहीं से बुलावा नहीं आया है। लीलाएं न हुईं तो परिवार के सामने आर्थिक संकट पैदा हो जाएगा।
फोटो-8 वीरेंद्र
तो टूट जाएगी सालों पुरानी परंपरा
रामलीला में दशरथ, जनक और भरत का किरदार निभाने वाले कोंच के वीरेंद्र त्रिपाठी कहते हैं कि वह 20 सालों से लीलाओं में हिस्सा ले रहे हैं। लीला का समय नजदीक आते ही जुबान से डायलाग निकलने लगते हैं। वह कहते हैं कि इस बार लीला न हुई तो सालों पुरानी परंपरा टूट जाएगी।
फोटो-9 संजय सोनी।
प्रयास जारी, ताकि जुड़ी रहें भावनाएं
रामलीला कमेटी के मंत्री संजय सोनी का कहना है कि कोरोना का असर कम नहीं हो रहा है। ऐसे में लीला का आयोजन कलाकारों और दर्शकों किसी की सेहत के लिए ठीक नहीं है। प्रयास होगा कि प्रतीकात्मक लीला करा दी जाए। इससे कलाकारों और दर्शकों की भावनाएं बनी रहेंगी।
फोटो-10 अशोक कुमार, एसडीएम।
सरकार की गाइड लाइन का इंतजार
कोंच एसडीएम अशोक कुमार का कहना है कि यहां की लीला ऐतिहासिक है। सरकार की ओर से अभी तक लीला के लिए कोई गाइड लाइन जारी नहीं की गई है। गाइड लाइन का इंतजार किया जा रहा है। शासन से जो भी निर्देश मिलेगा, उसी के अनुरूप आगे की कार्रवाई की जाएगी।