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Jalaun News: कोंच-सरसोकी शटल तीन माह के लिए बंद, अब डग्गामार सहारा

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फोटो-01-कोंच स्टेशन पर खड़ी कोंच शटल। संवाद
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उरई (कोंच)। कोहरे के चलते रेलवे ने एक दिसंबर से 28 फरवरी तक कोंच-सरसोकी शटल ट्रेन का संचालन बंद कर दिया है। अब शटल केवल एट-कोंच के बीच ही चलेगी। इस निर्णय से रोजाना उरई आने-जाने वाले यात्रियों की मुश्किलें बढ़ गईं हैं। पहले यह दूरी 10 रुपये में आसानी से तय हो जाती थी, लेकिन अब डग्गामार व बसों से सफर करने पर 40 रुपये तक खर्च करने पड़ेंगे।
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खासकर गरीब परिवार, विद्यार्थी, मरीज, तीमारदार और नौकरीपेशा लोगों पर आर्थिक बोझ बढ़ा है। लोगों का कहना है कि प्रतिदिन आने जाने वाले लोगों को अब अतिरिक्त शुल्क देना पड़ेगा।
कोंच- एट शटल देश की सबसे छोटी 13 किमी ब्रॉडगेज लाइन पर चलने वाली ऐतिहासिक ट्रेन है। इसका इतिहास 1904 से शुरू होता है, जब कपास व अन्य सामग्री एट जंक्शन के माध्यम से कोलकाता व मुंबई भेजने के लिए यह लाइन बनाई गई थी। आजादी के बाद इसे मालगाड़ी से यात्री सेवा में बदला गया लेकिन 1997 में घाटे के कारण बंद कर दिया गया। इसी वर्ष मार्च में स्थानीय आंदोलन के बाद सेवा फिर से बहाल हुई। इसके बाद 13 मार्च 2023 को विस्तार कर इसे सरसोकी तक बढ़ा दिया गया जिससे दूरी 13 से बढ़कर 46 किलोमीटर हो गई। इससे कोंच से जिला मुख्यालय उरई तक यात्रा आसान हो गया है लेकिन एक दिसंबर से कोहरा होने की बात कहकर इसके तीन माह के लिए बंद कर दिया।
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सोमवार सुबह कई यात्री रोज की तरह तय समय पर स्टेशन पहुंचे लेकिन शटल रद्द मिलने पर निराश होकर लौट गए। नियमित कामकाज व पढ़ाई के लिए अब उन्हें निजी वाहनों या डग्गामार साधनों का सहारा लेना पड़ा। लोगों का कहना है कि बड़ी मुश्किल में यह सेवा शुरू हुई थी, अब इसे बंद कर लोगों को डग्गामार वाहनों से जबरन यात्रा करवाने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है। अब समय के साथ-साथ अतिरिक्त बोझ भी बढ़ेगा।
इनसेट
रूट पर केवल दो रोडवेज बसें
कोंच से जिला मुख्यालय की दूरी करीब 30 किलोमीटर है। लोगों को स्टेशन तक पहुंचने के लिए कोंच से करीब 50 रुपये लगते हैं। कोंच होते हुए केवल दो रोडवेज बसों का ही संचालन होता है। अधिकतर यात्री डग्गामार वाहनों का ही सहारा लेते हैं लेकिन जबसे कोंच से सरसौकी तक शटल सेवा शुरू की गई थी, तो अधिकतर लोग इससे यात्रा कर रहे थे लेकिन एक दिसंबर से बंद की सूचना पर लोगों का कहना है कि अब उन्हें डग्गामार वाहनों से यात्रा करनी पड़ेगी। क्योंकि अब इसके सिवा कोई सहारा भी नहीं है।
यात्रा अब महंगी और असुरक्षित
फोटो -02- राज कुशवाहा।
वे रोज पढ़ाई के लिए उरई इसी शटल से आते-जाते थे। ट्रेन सस्ती और सुरक्षित थी, घरवालों को भी चिंता नहीं रहती थी। अब उन्हें मजबूरन निजी वाहनों से सफर करना पड़ेगा। इससे खर्च और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं।
- राज कुशवाहा
गरीब परिवार होंगे सबसे ज्यादा परेशान
फोटो 03 मोहन सिंह।
शटल गरीब परिवारों के लिए वरदान थी। कम किराये में उरई पहुंचना आसान था, लेकिन अब उन्हीं यात्रियों को सबसे ज्यादा परेशानी होगी। ट्रेन को निरस्त करने से पहले लोगों के लिए अधिकारियों को सोचना चाहिए था। - मोहन सिंह
वर्जन
कोहरे के कारण रेलवे बोर्ड के निर्देश पर कई ट्रेनें निरस्त की गईं और कई के फेरों में कटौती गईं हैं। इनमें कोंच, एट सरसोकी शटल सेवा भी शामिल है।

- मनोज कुमार सिंह, पीआरओ
फोटो-4-प्लेटफार्म नंबर तीन पर खड़ी आजमगढ़-मुंबई-संत कबीर नगर एक्सप्रेस। संवाद
छपरा मेल समेत दो ट्रेनें निरस्त, दो बदले मार्ग से निकाली गईं, कई देरी से आईं
उरई। झांसी-कानपुर रेलखंड से यात्रा करने वाले यात्रियों की परेशानियां कम नहीं हो रही हैं। सोमवार को इस रेलखंड की दो ट्रेनें निरस्त रहीं, जबकि दो ट्रेनों के मार्ग को बदलकर संचालित किया गया। झांसी में स्टेशन पर हो रहे मरम्मत का कर होने की वजह से ट्रेनों को निरस्त एवं मार्ग परिवर्तित करके संचालित किया जा रहा है। इसमें ग्वालियर से बरौनी छपरा मेल (11123) व बढ़नी से बांद्रा जाने वाली स्पेशल ट्रेन (09044) का संचालन निरस्त रही। इसके अलावा बरौनी से ग्वालियर व सूबेदारगंज से उधना जाने वाली ट्रेन को बदले हुए मार्ग से संचालित किया गया।
दानापुर से पुणे की ओर जाने वाली ट्रेन (01482) स्पेशल निर्धारित समय रात के समय 1:10 बजे के स्थान पर दूसरे दिन दोपहर के 2:30 बजे आई। आजमगढ़ से मुंबई की ओर जाने वाली संत कबीरनगर एक्सप्रेस (20104) चार घंटा देरी से आई। मुंबई से मऊ जाने वाली (01123) 3 घंटा 27 मिनट, मुंबई से गोरखपुर की ओर जाने वाली ट्रेन (01079) दो घंटा 28 मिनट, गोरखपुर से यशवंतपुर जाने वाली ट्रेन (22533) पौने दो घंटा देरी से आई। इन ट्रेनों की लगातार धीमी गति से संचालन होने की वजह से यात्रियों को लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
यात्रियों का कहना है कि स्पेशल ट्रेन में अधिक किराया देने के बावजूद भी ट्रेन घंटों देरी से आ रही है । लेटलतीफी कम न होने की वजह से लगातार इंतजार करना पड़ रहा है जिसकी वजह से अपने गंतव्य तक पहुंचने में कई घंटे देरी से पहुंच रहे हैं। झांसी मंडल के पीआरओ मनोज कुमार सिंह का कहना है कि ट्रेनों के संचालन पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है। जिससे यात्रियों को परेशानी न हो। (संवाद)

फोटो-01-कोंच स्टेशन पर खड़ी कोंच शटल। संवाद

फोटो-01-कोंच स्टेशन पर खड़ी कोंच शटल। संवाद

फोटो-01-कोंच स्टेशन पर खड़ी कोंच शटल। संवाद

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