उरई। कर्मचारियों को नौ बजे से कार्यालय बुलाने के निर्देश के विरोध में कर्मचारियों ने मोर्चा खोल दिया है। गुरुवार को राज्य कर्मचारी संयुक्त परिषद के तत्वावधान में दर्जनों कर्मचारियों ने कलक्ट्रेट सभागार में एक दिवसी धरना दिया। इस प्रदर्शन में शिक्षक संघ व कलक्ट्रेट संघ व राज्य कर्मचारी महासंघ ने भी धरने का सहयोग किया। इस दौरान संघ के कर्मचारियों ने सप्ताह में पांच दिन का कार्य दिवस करने की मांग की।
धरना सभा में राम प्रसाद श्रीवास्तव ने कहा कि शासन के निर्देश है कि जिले के सभी अधिकारी अपने कार्यालय में सुबह नौ बजे से बैठ कर जनसुनवाई करें, लेकिन शासनादेश के विरुद्ध जिले के अधिकारियों ने तृतीय व चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को भी सुबह नौ बजे से ऑफिस आने के निर्देश दिए है। जो की कर्मचारियों का शोषण है। इससे कर्मचारियों में आक्रोश व्याप्त है। अंगर सिंह ने कहा कि कर्मचारियों के कार्यालय अवधि के संबंध में तत्कालीन मुख्य सचिव ने अपने अर्द्ध शासकीय पत्र जारी करते हुए तृतीय एवं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को सुबह दस बजे से कार्यालयों में उपस्थित होकर कार्य करने व मध्यान्ह भोजन हेतु आधा घंटे के निर्देश जारी किए है, लेकिन फिर भी जिले के अधिकारी नियम विरूद्ध कर्मचारियों का नौ बजे से बुलाना चाहते है। शिक्षक समन्वयक समिति के रामराजा द्विवेदी, यदुवीर सिंह कंथरिया, महेन्द्र भाटिया ने भी राज्य कर्मचारियों के आंदोलन का समर्थन करते हुए धरना दिया और चेतावनी दी कि अगर कर्मचारियों का समय बदला न गया तो शिक्षक संघ भी सड़कों पर उतरेगा। बैठक में शील कुमार दूरवार ने बताया कि प्रांतीय नेतृत्व ने कार्यालय समय के परिवर्तन के संबंध में कई बार संपर्क करने का प्रयास किया गया तथा उक्त समस्या से ध्यानाकर्षण भी कराया गया, लेकिन अभी तक मुख्य सचिव की ओर से कोई स्पष्ट निर्देश नहीं दिए गए है। अंगद सिंह कछवाह ने कहा कि अगर नौ बजे के निर्देश दिए जाते हैं तो कर्मचारियों को एक सप्ताह में पांच दिन का कार्य दिवस घोषित होना चाहिए। नीरज राठौर, मान सिंह यादव, धीरेंद्र कुमार दुबे, दिलीप महेश्वरी, कमलेश कुमार, अनिल कुमार, ओम नारायण सचान, भानु प्रताप सिंह आदि कर्मचारी उपस्थित रहे।