सीएम की प्राथमिकता वाली कामधेनु योजना परवान नहीं चढ़ पा रही है। श्वेत
क्रांति लाने के उद्देश्य से शुरू की गई योजना का सच यह है कि जो डेयरी
क्रियाशील हैं उनमें पशुओं की संख्या पूरी नहीं है। डेयरी में जो पशु हैं
वे उम्मीद से कम दूध दे रहे हैं। कामधेनु का छोटा प्रारूप भी सरकार ने लांच
किया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। माइक्रो कामधेनु योजना में गाय
व भैंस
पालने वाले भी नहीं मिले। यही वजह है कि शासन से मिला 30 डेयरी का लक्ष्य
आधा अधूरा है। कुल मिलाकर सीएम की कामधेनु से जिले में दूध नहीं निकल रहा
है। इस योजना पर मौसम का सीधा प्रभाव भी नजर आ रहा है।
सीएम अखिलेश यादव
ने बड़े कास्तकारों के लिए कामधेनु योजना शुरू की थी। एक करोड़ 20 लाख के
बजट की इस योजना में किसानों को ब्याज मुक्त ऋण उपलब्ध कराया गया। माना जा
रहा था कि सीएम की मंशा श्वेतक्रांति लाने की है
जिससे किसान खुशहाल रहेगा
और दूध के साथ दही, मक्खन, घी की भी कमी नहीं रहेगी। सीएम की इस मंशा पर
सरकारी मशीनरी को लक्ष्य देकर लगाया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ। जिले
में चार कामधेनु डेयरी का लक्ष्य दिया गया। ये
बमुश्किल पूरा हुआ और सरकारी
मशीनरी ने लगकर डेयरी क्रियाशील कराई। अब क्रियाशील डेयरी में दुधारू
पशुओं की संख्या पूरी नहीं है। लगातार मौसम की बेरहमी को देखते हुए कोई भी
पशुओं की संख्या नहीं बढ़ाना चाह रहा। हालत यह है
कि किसी डेयरी में 40 पशु
हैं तो किसी में संख्या इससे भी कम है। यही हाल मिनी कामधेनु योजना का है।
जिले के लिए 15 मिनी कामधेनु योजना का लक्ष्य दिया गया। बड़ी मुश्किल से
लक्ष्य पूरा हुआ और 13 डेयरी क्रियाशील हो पाईं। पशुओं की संख्या भी कम है।
माइक्रो कामधेनु को नहीं मिल रहे पालक
कामधेनु
का छोटा प्रारूप कही जा रही माइक्रो कामधेनु योजना के लिए पालक ढूढ़े नहीं
मिल रहे है। यही वजह है कि पशुपालन विभाग को मिले 30 माइक्रो कामधेनु के
लक्ष्य के सापेक्ष अब तक 14 पालक ही मिले है जिनका ऋण बैंक से
स्वीकृत भी
हो गया है। इसमें से भी तीन डेयरी संचालित हो पाई हैं। 25 दुधारू पशुओं की
इस डेयरी में भी संख्या पूरी नहीं है। कागजों में डेयरी का संचालन दिखाया
जा सके इसके लिए कहीं पांच तो कहीं पर 10 गाय व भैंस ही बंधी हैं।
मौसम की मार से घटा दूध
योजना
पर मौसम का असर भी साफ दिख रहा है। डेयरी संचालक सूखा के चलते कोई भी
जोखिम उठाने को तैयार नहीं हैं। एक डेयरी संचालक का कहना है कि इस साल हरे
चारे के लिए भी संकट है। ऐसे में पशु दूध भी कम दे रहे हैं। आगे भूसा का
संकट भी है। मौसम जब साथ दे तो पशुओं की संख्या बढ़ाई जाएगी।
वर्जन
माइक्रो
कामधेनु योजना में 30 का लक्ष्य था जिसमें से 14 डेयरी स्वीकृति हो गई
हैं। इसमें तीन क्रियाशील है। मिनी कामधेनु और कामधेनु डेयरी में पशुओं की
संख्या कम है जिसे पूरा करने के लिए लगातार डेयरी संचालकों से कहा जा रहा
है।- एसके शाक्य, मुख्य पशु चिकित्साधिकारी जालौन