उरई। कालपी के कागज उद्योग को अब पंख लगने वाले हैं। इसकी बेवसाइट तैयार कर इसके अन्य उत्पाद भी अब बनाए जाएंगे। एक उत्पाद हस्तनिर्मित कागज की गुणवत्ता, संवर्धन व्यापार व्यवस्था व इससे बने उत्पादों की कीमत को लेकर आईआईटी कानपुर के तत्वावधान में एक दिवसीय सेमिनार हुआ। जिसमें कानपुर से आए अधिकारियों ने अपने विचार व्यक्त किए और फिर कालपी के राजकीय औद्योगिक स्थानों का भ्रमण किया।
कलक्ट्रेट सभागार में डीएम राजेश कुमार पांडेय की अध्यक्षता में एक जिला एक उत्पाद हस्त निर्मित कागज की गुणवत्ता को लेकर बैठक हुई। जिसमें आईआईटी कानपुर की डॉ.रीता सिंह, रंजीत सिंह रोजी, डॉ. मोनिका ठाकुर ने ओडीओपी उत्पाद हस्तनिर्मित पेपर के निर्माण, उसके स्वरूप को बदलने, मार्केटिंग की वर्तमान व्यवस्था, कठिनाई व प्रतिस्पर्धा के बारे में विस्तार से जानकारी दी गई।
मोनिका कपूर ने आईआईटी द्वारा हस्तनिर्मित कागज के विषय में अब तक की गई बैठकों व सेमिनार विजिट के बारे में विस्तार से डीएम को जानकारी दी। साथ ही हस्तनिर्मित पेपर के विषय में भविष्य में किए जाने वाले कार्यों को क्रमबद्ध तरीके से बताया। इसमें जालौन के हस्तनिर्मित कागज की बेवसाइट बनाना, इच्छुक छात्रों व व्यक्तियों को रोजगार युक्त विशेष प्रशिक्षण प्रदान करना है।
इसमें आईआईटी व देश के अन्य प्रतिष्ठित प्रोफेसरों व मास्टर ट्रेनरों के माध्यम से अत्याधुनिक तकनीक के साथ-साथ सैद्धांतिक व व्यावहारिक प्रशिक्षण प्रदान कराए जाने का प्रस्ताव रखा गया। आईआईटी की टीम ने कालपी स्थित औद्योगिक आस्थानों का भ्रमण किया। वहां के कागज उद्यमियों से भी जानकारी लेकर बातचीत की। डीएम ने हस्तनिर्मित कागज के कर्न्वजन से बने उत्पादों के बनाने व बनाने में इच्छा रखने वालों को छह सप्ताह का प्रशिक्षण कराए जाने के निर्देश दिए। डीएम ने सहायक आयुक्त उद्योग को निर्देश दिए कि प्रशिक्षण के आवंटन के लिए आयुक्त एवं निदेशक कानपुर को उनके हस्ताक्षर से पत्र प्रेषित करें। कालपी के कागज की बेवसाइट तैयार करें। हाईवे पर कागज से संबंधित डिस्पले का निर्माण करें।