कदौरा। नगर पंचायत कदौरा में अध्यक्ष और सभासद आमने-सामने आ गए हैं।
सभासदों ने अध्यक्ष, अध्यक्ष पति और अधिशासी अधिकारी पर अपने ही रिश्तेदारों को काम देने और भ्रष्टाचार के साथ ही अधिकारों का दुरुपयोग करने का आरोप लगाया है। सभासद विरोध करते हुए बुधवार को जिला अधिकारी कार्यालय पहुंचे। यहां उन्होंने इन आरोपों के साथ नारेबाजी की और जिलाधिकारी राजेश कुमार पांडेय से प्रशासनिक अधिकारों को सीज करने की मांग की।
नगर पंचायत कदौरा में 12 वार्ड हैं। इनमें भाजपा समेत अलग-अलग पार्टियों से जुड़े नेता सभासद हैं। सभासद राज कुमार, विजय लक्ष्मी, राजेश कुमार, राकेश प्रजापति, गीता, मोहम्मद शकील, अंकित कुमार, राजवीर विश्वकर्मा, सविता गुप्ता, मोहम्मद वसीम, मोहम्मद शरीफ व करिश्मा ने अपनी मोहर और हस्ताक्षर के साथ डीएम राजेश कुमार पांडेय को ज्ञापन सौंपा।
इसमें कहा कि आठ ऐसी फर्में हैं, जिनसे सरकारी सामान मंगाया गया। ये सभी नगर पंचायत अध्यक्ष के रिश्तेदारों की फर्म हैं। ईओ के साथ मिलीभगत की गई है। कान्हा गोशाला में ईओ ने सभासदों के जाने पर रोक लगा दी है। अध्यक्ष के पति नगर पंचायत में स्वयं हस्ताक्षर कर काम कराते हैं। यही नहीं अध्यक्षा अर्चना शिवहरे के परिवार में अन्य भी नगर पंचायत के कार्यों में हस्तक्षेप करते हैं, जिससे अराजकता का माहौल है। घर में काम करने वालों को भी सरकारी पैसे का मानदेय दिलाया जा रहा है। सभासदों ने जांच के साथ सख्त कार्रवाई की मांग उठाई है।
-जिन भी फर्मों से सामान लिया जा रहा है, उसमें सभी सभासदों की सहमति है। सहमति मिलने के बाद ही फर्म चुनी जाती है। आरोप निराधार हैं। जांच होगी तो कमेटी के सामने सारी बात रखी जाएगी। -अर्चना शिवहरे, अध्यक्ष, नगर पंचायत कदौरा
रामपुरा। नगर पंचायत रामपुरा में नाला टेंडर में घपला करने का आरोप लगाते हुए सभासदों ने जिलाधिकारी को ज्ञापन सौंपा।
उन्होंने कहा कि ऑफलाइन टेंडर हो सकें, इसके लिए नगर पंचायत अध्यक्ष और ईओ ने मिलकर तीन नालों के 24 टुकड़ों में टेंडर कर दिए। 19 जनवरी को यह टेंडर खुलेगा, उसके बाद अपनी मनमर्जी से करीबी ठेकेदारों को टेंडर दे दिया जाएगा। उन्होंने इस मामले में कार्रवाई की मांग की है।
नगर पंचायत क्षेत्र रामपुरा के सभासद मनोज, रजना देवी, सूरजमुखी, जाकिर व विमल कुमार ने ज्ञापन में कहा कि पहला नाला कल्लू यादव के होटल से राजू खां के प्लॉट तक है। दूसरा नाला पचोखरा रोड पर है। तीसरा नाला रघुनंदन के घर से मुन्नी लाल के घर से होते हुए दीनदयाल के घर तक है। तीनों नाले 100 से करीब 300 मीटर लंबाई के हैं। 10 लाख रुपये से अधिक टेंडर को ऑनलाइन करना पड़ता है।
इसलिए उससे कम राशि तक के टेंडर निकालने के लिए 1,54,11,000 रुपये के काम के तीन नालों के 24 टुकड़ों में ऑफलाइन टेंडर निकाल दिए गए। इसमें सबसे कम राशि का टेंडर 5.47 लाख, जबकि सबसे अधिक राशि का टेंडर 7.73 लाख रुपये का है। इसमें अनुबंध की जो शर्त है, वह भी नियमानुसार नहीं है। सभासदों ने इस मामले में जांच की मांग रखी है। एडीएम नमामि गंगे विशाल यादव ने बताया कि शिकायत मिलने के बाद मामले को दिखवाएंगे।
कोई टेंडर ऑफलाइन नहीं है। नाले के साथ ही राज्य वित्त आयोग के भी टेंडर भी ऑनलाइन ही हैं। कुछ लोग गलत आरोप लगाकर कार्यों को बेपटरी पर लाने की साजिश कर रहे हैं। -गायत्री वर्मा, अध्यक्ष, नगर पंचायत, रामपुरा
कालपी। महेवा ब्लॉक के ठेकेदारों ने टेंडर प्रक्रिया को लेकर सवाल उठाते हुए जांच की मांग की है। ठेकेदार राजकुमार सिंह, सीताराम, निर्भय, देवेंद्र कुमार चंद्रपाल आरोप लगाते हुए कहा कि महेवा ब्लॉक में 59 ग्राम पंचायतों में मनरेगा एवं ग्राम निधि से एक लाख से ऊपर के पक्के कार्य कराए जाते हैं।
आरोप है कि ज्यादातर ग्राम पंचायत में ग्राम सचिव और प्रधानों की मनमानी से टेंडर प्रक्रिया हो रही है। इनके विज्ञापन भी गुपचुप ढंग वाले प्रकाशित होते हैं, जो जनता नहीं देख पाती है। जिम्मेदार मिलीभगत से बैक टेंडर निकालते हैं ग्राम निधि का पैसा उसी के तहत निकाल लिया जाता है। कई जिम्मेदार अधिकारी 99 हजार के प्रस्ताव तैयार कर उन्हें कई हिस्सों में बांटकर अपने चहेतों को टेंडर देते हैं। जांच की मांग की गई है। बीडीओ विपिन कुमार ने बताया कि इस प्रकार की धांधली मिलने पर सचिव के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।