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दो घर जलते रहे, पानी न मिलने से बेबस लोग देखते रहे

Sat, 09 Apr 2016 11:06 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो, उरई
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कदौरा में जलते घर। - फोटो : अमर उजाला
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दैवी आपदा और सूखे से जूझ रहे बुुंदेलखंड मेें आग ने तबाही मचा रखी है। ऐसे में पीने तक के पानी को मोहताज लोगों को अब आग बुझाने को भी पानी नहीं मिल रहा। कदौरा के सिद्धार्थनगर में शुक्रवार देर रात यही स्थिति हो गई। यहां एक घर में लगी आग पानी न मिलने से बुझाई नहीं जा सकी और फिर दूसरा घर भी चपेट में आ गया। दोनों घरों का
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सारा सामान जलकर राख हो गया। मोहल्ले के सभी छह हैंडपंपों के खराब होने और छह महीने से पीने तक के पानी को मोहताज बेबस लोग सामने घर जलते देखते रहे और कुछ न कर सके। उधर, दमकल विभाग को भी फोन किया पर समय पर विभागीय गाड़ी के न पहुंचने से नुकसान नहीं रोका जा सका।

कस्बा कदौरा के मोहल्ला सिद्धार्थ नगर निवासी रजिया खातून पत्नी कुदरत शाह के कच्चे मकान में शुक्रवार की रात 12 बजे आग लग गई। इससे मोहल्ले में अफरातफरी मच गई। मोहल्ले के लोगों ने घरों में पीने के लिए रखे पानी से आग बुझाने का प्रयास किया लेकिन कुछ बाल्टी पानी से आग कहां बुझने वाली थी। लोग पानी के इंतजाम के लिए भागते रहे
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और आग बढ़ती गई। मोहल्ले में पानी उपलब्ध न होने से आग बढ़ती गई और पड़ोस के बाबू खां के कच्चे मकान को भी चपेट में ले लिया। इससे दोनों मकानों में रखे गृहस्थी के सामान, कपडे़, बर्तन, गेहूं, जेवर नकदी आदि सामान जलकर राख हो गया। मोहल्ले के सभी हैंडपंप खराब होने और पानी का कोई और इंतजाम नहीं होने से लोग अपने घर जलते

देखते रहे और कुछ नहीं कर सके। उधर, पीड़िता रजिया ने बताया कि शुक्रवार को पूरा परिवार कानपुर देहात में रिश्तेदार केे यहां शादी समारोह में शामिल होने गया था। घर पर कोई नहीं था। रात मेें किसी ने रंजिशन घर में आग लगा दी। इस दौरान सोने, चांदी के जेवर गृहस्थी का सामान, 30 हजार नकद, रेडीमेड कपडे़ जलकर राख हो गए। लड़का

रेडीमेड कपड़ों को फेरी लगाकर बेचता है। घर में एक लाख रुपये कीमत के रेडीमेड कपडे़ रखे थे जो जलकर राख हो गए। दूसरे मकान में मदीना नाम की एक महिला अकेली रहती थी। उसका भी करीब पचास हजार का सामान जलकर राख हो गया।

पीने के पानी के लाले कहां से आग बुझाते
सिद्धार्थनगर निवासी राजेश कुमार ने बताया कि मुहल्ले के सभी छह हैंडपंप खराब पड़े हैं। एक किलोमीटर दूर स्थित दूसरे गांव से पीने का पानी लाया जाता है। जब आग लगी तो कुछ घरों से चंद बाल्टी पानी लाया गया लेकिन इससे आग काबू में नहीं आ सकी।

पानी का टैंकर तक नहीं आता
सिद्धार्थनगर के ही बालक दउस के मुताबिक सूखे ने कहीं का नहीं छोड़ा। अधिकारियों से शिकायत के बावजूद प्रशासन और प्रधान टैंकर तक की व्यवस्था नहीं कर पा रहे। ऐसे में आग बुझाने को पानी कहां से लाते। हमारे सामने ही दो घर जलकर राख हो गए, हम कुछ नहीं कर पाए।

हैंडपंप कराए जाएं रीबोर
सिद्धार्थनगर निवासी बृजकिशोर ने बताया कि यहां हैंडपंपों के खराब होने की समस्या छह महीने पुरानी है। टैंकर आदि उपायों से यहां कुछ होने वाला नहीं। सूखे से जलस्तर नीचे चला गया है, इसलिए इन हैंडपंपों का रीबोर कराया जाना चाहिए। वर्ना ऐसे ही आग लगती रहेगी और हम हाथ पर हाथ धरे बैठे रह जाएंगे।

शिकायत के बावजूद नहीं हुई सुनवाई
सिद्धार्थनगर के दिलीप कुमार के अनुसार छह महीने से हैंडपंप खराब हाने की शिकायत जल संस्थान, नगर पंचायत अध्यक्ष व वार्ड मेंबर आदि से शिकायत की गई पर किसी ने नहीं सुनी। अब गांव में आग लगी तो लोगों के पास आग बुझाने तक को पानी नहीं था।  

एसडीएम ने दिए जांच के आदेश
मामले की गंभीरता को देखते हुए एसडीएम गोरेलाल शुक्ला ने जांच के आदेश दिए। उन्होंने मौके पर लेखपाल तेजराम कुशवाहा को भेजकर नुकसान का आंकलन भी करवाया। तेजपाल ने अपनी रिपोर्ट में तीन लाख के नुकसान की बात कही है।
 
बहनोई के खिलाफ दी तहरीर
इस घटना में रजिया खातून के पुत्र छक्कन ने बहनोई इमरान के खिलाफ थाने में तहरीर दी है। तहरीर में कहा गया है कि तीन दिन पूर्व कानपुर देहात के दौलतपुर में पूरा परिवार शादी में शरीक होने गया था। तभी छक्कन और इमरान में मारपीट हुई। छक्कन ने आरोप लगाया कि इसी रंजिश में इमरान ने रात को उसके मकान में आग लगा दी। 
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