भारतीय इतिहास संकलन समिति कानपुर प्रांत का प्रथम अधिवेशन रविवार को शहर के सिटी सेंटर में हुआ। इसमें बुंदेलखंड के कई जनपदों के इतिहासकारों ने सहभागिता कर इतिहास के संशोधन की वकालत की। कहा गया कि मौजूदा इतिहास में मूल्यों का अभाव है। इतिहास देखने की प्रकृति भारतीय नहीं है। यही वजह है कि अंग्रेजी में जो लिखा है उसमें भगत सिंह
को क्रांतिकारी के बजाए आतंकवादी बताया गया है। इतिहास देखने की दृष्टि शौर्य और सम्मान वाली होनी चाहिए। मन के दुर्योधन को मारकर इतिहास को नए सिरे से प्रकाश के बीच देखना होगा। अधिवेशन क ा शुभारंभ मां सरस्वती के चित्र पर माल्यार्पण के साथ हुआ। इसके बाद इतिहासकारों ने कहा कि इतिहास किसी भारतीय ने नहीं लिखा इसलिए इसमें
भारतीय मूल्यों को स्थान नहीं मिला है। हमारे देश की पराक्रम, शौर्य को भी दूसरी नजर से देखा गया है। मुख्य अतिथि बुंदेलखंड विवि झांसी के कुलपति प्रो. सुरेंद्र दुबे ने कहा कि हर भारतीय को मन के दुर्योधन को मारकर इतिहास को नए सिरे से देखना हेागा। इतिहास हमें अतीत और वर्तमान को जोड़ता है। इतिहास के पुनर्लेखन व पुन: प्रस्तुतिकरण पर जोर भी
दिया। मुख्य वक्ता डॉ. बाल मुकुंद पांडेय ने इतिहास संकलन पर कहा कि वामपंथी विचार के इतिहास को संशोधित कर एक ऐसे इतिहास को स्थापित करना होगा जो वास्तविकता को सामने रखे। उन्होंने कहा कि अंग्रेजी भाषा में जिस इतिहास को लिखा गया है उसमें मूल्यों की अनदेखी के साथ देश के शौर्य व पराक्रम की भी अनदेखी की गई। उन्होंने इतिहास संकलन
पर नए सिरे से विचार करने का आह्वान भी किया। संयोजक डॉ. प्रयागनारायण त्रिपाठी ने कहा कि बुंदेलखंड के इतिहास के लिए सभी इतिहासकारों को समर्पण भाव से काम करना होगा। ओमपाल, डॉ. शारदा अग्रवाल, डॉ. राजेश चंद्र पांडेय, रामेश्वर प्रसाद त्रिपाठी ने भी विचार रखे। अधिवेशन के दूसरे सत्र में तकनीकी विषय पर जोरदार चर्चा हुई। इसमें विशेषज्ञों ने अपने
शोधपत्र प्रस्तुत किए। कार्यक्रम के सह संयोजक अभय द्विवेदी ने अतिथियों को सम्मानित किया। इस मौके पर डॉ. सलिल तिवारी, डॉ. विनोद कुमार अहिरवार, हरदत्त द्विवेदी, डॉ. डीके सिंह, राजाराम व्यास, डॉ. नीलम मुकेश, डॉ. राजेंद्र पुरवार, रामशंकर द्विवेदी आदि मौजूद रहे।